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Thursday, 26 January 2012

अजमेर की दरगाह शरीफ


दरगाह अजमेर शरीफ...एक ऐसा पाक-शफ्फाक नाम है जिसे सुनने मात्र से ही रूहानी सुकून मिलता है। अजमेर शरीफ में हजरत ख्वाजा मोईनुद्‍दीन चिश्ती रहमतुल्ला अलैह की मजार की जियारत कर दरूर-ओ-फातेहा पढ़ने की चाहत हर ख्वाजा के चाहने वाले की होती है, लेकिन हर कोई उनके द्वार पर दस्तक नहीं दे पाता ऐसे सभी श्रद्धालुओं के लिए धर्मयात्रा में हमारी यह प्रस्तुति खास तोहफा है।

फोटो गैलरी देखने के लिए क्लिक करें-

दरगाह अजमेर शरीफ का भारत में बड़ा महत्व है। खास बात यह भी है कि ख्वाजा पर हर धर्म के लोगों का विश्वास है। यहाँ आने वाले जायरीन चाहे वे किसी भी मजहब के क्यों न हों, ख्वाजा के दर पर दस्तक देने के बाद उनके जहन में सिर्फ अकीदा ही बाकी रहता है। दरगाह अजमेर डॉट काम चलाने वाले हमीद साहब कहते हैं कि गरीब नवाज का का आकर्षण ही कुछ ऐसा है कि लोग यहाँ खिंचे चले आते हैं। यहाँ आकर लोगों को रूहानी सुकून मिलता है।




भारत में इस्लाम के साथ ही सूफी मत की शुरुआत हुई थी। सूफी संत एक ईश्वरवाद पर विश्वास रखते थे...ये सभी धार्मिक आडंबरों से ऊपर अल्लाह को अपना सब कुछ समर्पित कर देते थे। ये धार्मिक सहिष्णुता, उदारवाद, प्रेम और भाईचारे पर बल देते थे। इन्हीं में से एक थे हजरत ख्वाजा मोईनुद्‍दीन चिश्ती रहमतुल्ला अलैह।

ख्वाजा साहब का जन्म ईरान में हुआ था अपने जीवन के कुछ पड़ाव वहाँ बिताने के बाद वे हिन्दुस्तान आ गए। एक बार बादशाह अकबर ने इनकी दरगाह पर पुत्र प्राप्ति के लिए मन्नत माँगी थी। ख्वाजा साहब की दुआ से बादशाह अकबर को पुत्र की प्राप्ति हुई। खुशी के इस मौके पर ख्वाजा साहब का शुक्रिया अदा करने के लिए अकबर बादशाह ने आमेर से अजमेर शरीफ तक पैदल ख्वाजा के दर पर दस्तक दी थी...

तारागढ़ पहाड़ी की तलहटी में स्थित दरगाह शरीफ वास्तुकला की दृष्टि से भी बेजोड़ है...यहाँ ईरानी और हिन्दुस्तानी वास्तुकला का सुंदर संगम दिखता है। दरगाह का प्रवेश द्वार और गुंबद बेहद खूबसूरत है। इसका कुछ भाग अकबर ने तो कुछ जहाँगीर ने पूरा करवाया था। माना जाता है कि दरगाह को पक्का करवाने का काम माण्डू के सुल्तान ग्यासुद्दीन खिलजी ने करवाया था। दरगाह के अंदर बेहतरीन नक्काशी किया हुआ एक चाँदी का कटघरा है। इस कटघरे के अंदर ख्वाजा साहब की मजार है। यह कटघरा जयपुर के महाराजा राजा जयसिंह ने बनवाया था। दरगाह में एक खूबसूरत महफिल खाना भी है, जहाँ कव्वाल ख्वाजा की शान में कव्वाली गाते हैं। दरगाह के आस-पास कई अन्य ऐतिहासिक इमारतें भी स्थित हैं।

धार्मिक सद्‍भाव की मिसाल- धर्म के नाम पर नफरत फैलाने वाले लोगों को गरीब नवाज की दरगाह से सबक लेना चाहिए...ख्वाजा के दर पर हिन्दू हों या मुस्लिम या किसी अन्य धर्म को मानने वाले, सभी जियारत करने आते हैं। यहाँ का मुख्य पर्व उर्स कहलाता है जो इस्लाम कैलेंडर के रजब माह की पहली से छठी तारीख तक मनाया जाता है। उर्स की शुरुआत बाबा की मजार पर हिन्दू परिवार द्वारा चादर चढ़ाने के बाद ही होती है।




देग का इतिहास- दरगाह के बरामदे में दो बड़ी देग रखी हुई हैं...इन देगों को बादशाह अकबर और जहाँगीर ने चढ़ाया था। तब से लेकर आज तक इन देगों में काजू, बादाम, पिस्ता, इलायची, केसर के साथ चावल पकाया जाता है और गरीबों में बाँटा जाता है।

कैसे जाएँ- दरगाह अजमेर शरीफ राजस्थान के अजमेर शहर में स्थित है। यह शहर सड़क, रेल, वायु परिवहन द्वारा शेष देश से जुड़ा हुआ है। यदि आप विदेश में रहते हैं या फिर यहाँ से जुड़ी ज्यादा जानकारी चाहते हैं तो दरगाह अजमेर डॉट कॉम या राजस्थान पर्यटन विभाग से संपर्क कर सकते हैं।

गणतंत्र दिवस पर भारत ने दिखाई सैन्य ताकत

Webdunia

भारत की राजधानी दिल्ली के राजपथ पर गणतंत्र दिवस की परेड के दौरान भारतीय सेना ने अपनी ताकत दिखाई। भारत की पहली महिला राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने तिरंगा फहराया और वे परेड की सलामी ले रही हैं। जहां पूरा राजपथ तिरंगे के रंग में रंग गया है वहीं सैन्य परेड और संस्कृतिक विविधता की ताकत को देखने के लिए थाइलैंड की प्रधानमंत्री मौजूद हैं।

*63वें गणतंत्र दिवस का रंगारंग समारोह
*1950 को लागू हुआ था भारत का संविधान
*थलसेना और वायुसेना की तैनाती
*मुख्य अतिथि थाइलैंड की प्रधानमंत्री

*इस वर्ष गणतंत्र दिवस समारोह की मुख्य अतिथि थाईलैंड की पहली महिला प्रधानमंत्री यिंगलक शिनवात्रा हैं।
*शहीद ले. जनरल नवदीप सिंह को मरणोपरांत अशोक चक्र दिया गया। नवदीप सिंह कश्मीर में आतंकवादियों से लड़ते हुए शहीद हो गए थे।

राज्यों की रंगारंग झांकियां : राजपथ से ऐतिहासिक लालकिल तक गुरुवार को निकली परंपरागत गणतंत्र दिवस परेड के दौरान विभिन्न झांकियों के जरिए दुनिया की सबसे अधिक सांस्कृतिक विविधता वाले देश भारत की संस्कृति, कला, संगीत, नृत्य और त्योहारों आदि का अद्भुत संगम देखने को मिला।

बिहार की झांकी में धरहारा परंपरा के माध्यम से परिवार में बेटियों के महत्व एवं स्थान को दर्शाया गया। इस परंपरा के तहत किसी परिवार में लड़की पैदा होने पर 10 फलदार वृक्ष लगाने की परंपरा है।

पश्चिम बंगाल की झांकी नोबेल पुरस्कार से सम्मानित कवि गुरू रवींद्र नाथ टैगोर को समर्पित थी जिसमें उनके द्वारा स्थापित शांति निकेतन को दर्शाया गया। जम्मू-कश्मीर ने श्रीनगर के स्थापत्यकला एवं धरोहर की झांकी पेश की तो छत्तीसगढ़ की झांकी में मिट्टी का काम करने वाले कलाकारों की पारंपरिक जिंझारी और डोंडाकी कला को प्रस्तुत किया गया।

राजपथ से ऐतिहासिक लालकिले तक सड़क के दोनों ओर खचा-खच भरे लोगों ने भारत की सांस्कृतिक विविधता को खूब सराहा। इनमें बड़ी संख्या में विदेशी भी थे। राजपथ पर राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल के साथ सलामी मंच पर बैंठी इस वर्ष की गणतंत्र दिवस परेड की खास मेहमान थाइलैंड की प्रधानमंत्री यिंगलक शिनावात्रा ने इन झांकियों में काफी उत्सुकता दिखाई।

महाराष्ट्र की झांकी में राज्य के ऐतिहासिक स्थलों प्राकृतिक आश्चर्यो, स्मारकों, पर्यटन स्थलों के दृश्यों की झलक देखने को मिली।

समुद्र की गोद में बसे गोवा की झांकी में वहां के लोगों के उल्लास और मस्ती भरी प्रकृति को उकेरती गोवा कार्निवल का प्रदर्शन किया गया। कर्नाटक की झांकी में प्राचीन सांस्कृतिक परंपरा एवं पूजा ‘भूताराधाने’ को साकार किया गया जबकि मेघालय की झांकी में जैंतिया त्योहार को जीवंत किया। राजस्थान की झांकी में अमेर के भव्य किला को दर्शाया गया जबकि असम की झांकी में ‘भोरताल नृत्य’ को प्रस्तुत किया गया। पंजाब की झांकी में शेर ए पंजाब महाराज रंजीत सिंह की महिमा देखने को मिली।

सामुदायिक भावना के लिए संयुक्त राष्ट्र से पुरस्कृत नगालैंड की झांकी में आपसी भाईचारे को दिखाया गया, वहीं किरत खाम्बू राय समुदाय के मनाए जाने वाले साकेवा त्योहार का प्रदर्शन सिक्किम की झांकी के जरिए हुआ।

इसी प्रकार, कपड़ा मंत्रालय की झांकी में हस्तशिल्प, मानव संसाधन विकास मंत्रालय की झांकी में साक्षर भारत, आदिवासी मामलों के मंत्रालय द्वारा आदिवासी सशक्तिकरण, सीपीडल्यूडी की झांकी में बर्फ की घाटी, चुनाव आयोग की झांकी में राष्ट्रीय मतदाता दिवस और वित्त मंत्रालय की झांकी में आर्थिक मोचरे को मजबूत करने के लिए उठाये गए कदमों का प्रदर्शन किया गया।

गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान कृषि मंत्रालय की झांकी में कृषि क्षेत्र के विविधिकरण, इस्पात मंत्रालय की झांकी में इस्पात के राष्ट्र को मजबूत बनाने, संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की झांकी में राष्ट्रीय ई प्रशासन और रेल मंत्रालय की झांकी में पंजाब मेल का प्रदर्शन किया गया।

इस बार की परेड में 23 राज्यों और केन्द्रीय मंत्रालयों एवं विभागों की झाकियां देश की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी झांकियों का प्रदर्शन किया गया । राष्ट्रीय बहादुरी पुरस्कार 2009 के लिए चुने गए 24 बच्चों में से 19 परेड में हिस्सा लिया।

इस बार की परेड में 23 राज्यों और केन्द्रीय मंत्रालयों एवं विभागों की झांकियों के जरिए देश के विकास और ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत से जुड़े पहलुओं का प्रदर्शन किया गया। राष्ट्रीय बहादुरी पुरस्कार 2009 के लिए चुने गए 24 बच्चों में से 19 परेड में हिस्सा लिया। दिल्ली के दो स्कूलों के 1200 छात्र-छात्राओं और विभिन्न सांस्कृतिक केन्द्रों के कलाकारों ने रंगारंग प्रस्तुतियां दी जबकि बीएसएफ के 154 जवान 30 मोटरसाइकिलों पर हैरतअंगेज करतब दिखाए।

सैन्य परेड : परेड के दौरान देश के रक्षा विकास एवं अनुसंधशन संगठन द्वारा विकसित 3000 किलोमीटर तक मार करने वाली अग्नि-4 मिसाइल, 150 किलोमीटर तक मार करने वाली ‘प्रहार’ मिसाइल और मानवरहित विमान ‘रूस्तम-1’ को दर्शाया गया। ध्वजारोहण के तुरंत बाद 21 तोपों की सलामी के बीच गजराज की तरह आसमान से मंडराते एमआई 17 हेलीकॉप्टरों ने गुलाब की पंखुरियां बिखेरी तो राजपथ पर बैठे सैकड़ों दर्शक मंत्रमुग्ध हुए बिना नहीं रह सके।

भारतीय सेना टी-72 टैंक, बहुप्रक्षेपण राकेट प्रणाली, पिनाका मल्टी बैरल राकेट प्रणाली और जैमर स्टेशन वीएचएफ (यूएचएफ) का भी प्रदर्शन किया गया। सेना के उन्नत हल्के हेलीकॉप्टर ‘ध्रुव’ ने आकाश में स्वदेशी तकनीकी क्षमता की पताका फहराई। भारतीय वायुसेना ने पहली बार सी-130-जे सुपर हरक्यूलिस विमान का प्रदर्शन किया।

परेड के दौरान परमाणु जैविक रासायनिक शुद्धिकरण प्रणाली के अलावा जैमर स्टेशन का भी प्रदर्शन किया गया। परेड में सेना की 61वीं कैवेलरी, पैराशूट रेजीमेंट, बंगाल इंजीनियर ग्रुप, ब्रिगेड आफ गार्डस, कुमाउं रेजीमेंट, असम रेजीमेंट, महार रेजीमेंट, गोरखा राइफल्स रेजीमेंट और कोर आफ मिल्रिटी पुलिस के जवान शामिल थे।

नौसेना के दस्ते में लेफ्टिनेंट मणिकंदन के. के नेतृत्व में 148 जवानों और वायुसेना के दस्ते में फ्लाइट लेफ्टिनेंट स्नेहा शेखावटे के नेतृत्व में 144 अन्य जवानों ने राष्ट्रपति को सलामी दी। इंस्पेक्टर अनिल कुमार की अगुवाई में 30 बाइक पर सवार 154 जवानों का जाबांज प्रदर्शन।

वायुसेना के सी-130-जे सुपर हरक्यूलिस विमान पहली बार परेड में शामिल हुए। परेड के समापन पर फ्लाईपास्ट का नेतृत्व तीन एमआई-35 हेलीकॉप्टरों ने किया। उनके पीछे एक आईएल-78, दो एएन-32 और दो ड्रोनियर ने आकाश में भारत की शक्ति का प्रदर्शन किया।

इसके बाद, पांच जगुआर और पांच मिग-29 लड़ाकू विमानों ने आकाश के सीने को चीरते हुए गणतंत्र का जयघोष किया। एसयू-30 एमकेआई विमान भी फ्लाईपास्ट का हिस्सा बने।

अर्धसैनिक बलों और अन्य असैन्य बलों मसलन सीमा सुरक्षा बल, असम राइफल्स, तटरक्षक बल, केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस, केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल, सशस्त्र सीमा बल, रेलवे सुरक्षा बल, दिल्ली पुलिस, राष्ट्रीय कैडेट कोर और राष्ट्रीय सेवा योजना के दस्तों ने भी मार्च पास्ट में हिस्सा लिया।

कड़ी सुरक्षा : चाक चौबंद सुरक्षा व्यवस्था के बीच इस बार की परेड का एक महत्वपूर्ण आकर्षण खोजी कुत्ते थे जिन पर दिल्ली पुलिस का बम निरोधक दस्ता और राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड आतंकवादी घटनाओं और अन्य वारदात की जांच में बहुत भरोसा करते हैं। खोजी कुत्तों ने कई तरह की दक्षता का प्रदर्शन किया।

गणतंत्र दिवस समारोह के लिए सुरक्षा के चाक चौबंद प्रबंध किए गए और किसी तरह की अप्रिय घटना से निपटने के लिए अर्ध सैनिक बलों, दिल्ली पुलिस के जवानों के अलावा एनएसजी को तैनात किया गया। ऊंची इमारतों पर अचूक निशानेबाज तैनात थे तो हेलीकॉप्टरों से वायु निगरानी की व्यवस्था करने के साथ क्लोज सर्किट कैमरे लगाए गए। परेड जिस रास्ते से गुजर रही थी उसके आस पास की हर इमारत पर सुरक्षा बल चौकसी बरत रहे थे।

गणतंत्र दिवस समारोह का समापन राष्ट्रगान और आकाश में गुब्बारे छोड़ने के साथ हुआ।

मां सरस्वती की उपासना का पर्व वसंत पंचमी

वसंत

माघ शुक्ल पंचमी को मनाए जाने वाले सारस्वत महोत्सव का महत्व निराला है। मां सरस्वती विद्या, बुद्धि, ज्ञान और वाणी की अधिष्ठात्री देवी हैं तथा शास्त्र ज्ञान को देने वाली है। भगवती शारदा का मूलस्थान अमृतमय प्रकाशपुंज है। जहां से वे अपने उपासकों के लिए निरंतर पचास अक्षरों के रूप में ज्ञानामृत की धारा प्रवाहित करती हैं। उनका विग्रह शुद्ध ज्ञानमय, आनन्दमय है। उनका तेज दिव्य एवं अपरिमेय है और वे ही शब्द ब्रह्म के रूप में पूजी जाती हैं।

सृष्टि काल में ईश्वर की इच्छा से आद्याशक्ति ने अपने को पांच भागों में विभक्त कर लिया था। वे राधा, पद्मा, सावित्री, दुर्गा और सरस्वती के रूप में प्रकट हुई थीं। उस समय श्रीकृष्ण के कण्ठ से उत्पन्न होने वाली देवी का नाम सरस्वती हुआ। श्रीमद्देवीभागवत और श्रीदुर्गा सप्तशती में भी आद्याशक्ति द्वारा अपने आपको तीन भागों में विभक्त करने की कथा है। आद्याशक्ति के ये तीनों रूप महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती के नाम से संसार में जाने जाते हैं।

भगवती सरस्वती सत्वगुणसंपन्न हैं। इनके अनेक नाम हैं, जिनमें से वाक्‌, वाणी, गिरा, भाषा, शारदा, वाचा, श्रीश्वरी, वागीश्वरी, ब्राह्मी, गौ, सोमलता, वाग्देवी और वाग्देवता आदि प्रसिद्ध हैं। ब्राह्मणग्रंथों के अनुसार वाग्देवीर ब्रह्मस्वरूपा, कामधेनु, तथा समस्त देवों की प्रतिनिधि हैं। ये ही विद्या, बुद्धि और सरस्वती हैं। इस प्रकार देवी सरस्वती की पूजा एवं आराधना के लिए माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि वसंत पंचमी को ही इनका अवतरण दिवस माना जाता है।

अतः वागीश्वरी जयंती एवं श्री पंचमी के नाम से भी इस तिथि को जाना जाता है। इस दिन इनकी विशेष अर्चा-पूजा तथा व्रतोत्सव के द्वारा इनके सांनिध्य प्राप्ति की साधना की जाती है। सरस्वती देवी की इस वार्षिक पूजा के साथ ही बालकों के अक्षरारंभ एवं विद्यारंभ की तिथियों पर भी सरस्वती पूजन का विधान है।

भगवती सरस्वती की पूजा हेतु आजकल सार्वजनिक पूजा पंडालों की रचना करके उसमें देवी सरस्वती की मूर्ति स्थापित करने एवं पूजन करने का प्रचलन दिखाई पड़ता है, किंतु शास्त्रों में वाग्देवी की आराधना व्यक्तिगत रूप में ही करने का विधान बतलाया गया है।

भगवती सरस्वती के उपासक को माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को प्रातःकाल में भगवती सरस्वती की पूजा करनी चाहिए।
इसके एक दिन पूर्व अर्थात्‌ माघ शुक्ल पूजा करनी चाहिए। इसके एक दिन पूर्व अर्थात्‌ माघ शुक्ल चतुर्थी को वागुपासक संयम, नियम का पालन करें। इसके बाद माघ शुक्ल पंचमी को प्रातःकाल उठकर घट (कलश) की स्थापना करके उसमें वाग्देवी का आह्वान करे तथा विधिपूर्वक देवी सरस्वती की पूजा करें।

पूजन कार्य में स्वयं सक्षम न हो तो किसी ज्ञानी कर्मकांडी या कुलपुरोहित से दिशा-निर्देश से पूजन कार्य संपन्न करें।

मां
भगवती सरस्वती की पूजन प्रक्रिया में सर्वप्रथम आचमन, प्राणयामादि के द्वारा अपनी बाह्यभ्यंतर शुचिता संपन्न करे। फिर सरस्वती पूजन का संकल्प ग्रहण करे। इसमें देशकाल आदि का संकीर्तन करते हुए अंत में 'यथोपलब्धपूजनसामग्रीभिः भगवत्याः सरस्वत्याः पूजनमहं करिष्ये।' पढ़कर संकल्प जल छोड़ दें। तत्पश्चात आदि पूजा करके कलश स्थापित कर उसमें देवी सरस्वती साद आह्वान करके वैदिक या पौराणिक मंत्रों का उच्चारण करते हुए उपचार सामग्रियां भगवती को सादर समर्पित करे।

'श्री ह्यीं सरस्वत्यै स्वाहा' इस अष्टाक्षर मंत्र से प्रन्येक वस्तु क्रमशः श्रीसरस्वती को समर्पण करे। अंत में देवी सरस्वती की आरती करके उनकी स्तुति करे। स्तुति गान के अनन्तर सांगीतिक आराधना भी यथासंभव करके भगवती को निवेदित गंध पुष्प मिष्आत्रादि का प्रसाद ग्रहण करना चाहिए। पुस्तक और लेखनी में भी देवी सरस्वती का निवास स्थान माना जाता है तथा उसकी पूजा की जाती है।

देवी भागवत एवं ब्रह्मवैवर्तपुराण में वर्णित आख्यान में पूर्वकाल में श्रीमन्नरायण भगवान ने वाल्मीकि को सरस्वती का मंत्र बतलाया था। जिसके जप से उनमें कवित्व शक्ति उत्पन्न हुई थी। भगवान नारायण द्वारा उपदिष्ट वह अष्टाक्षर मंत्र इस प्रकार है- 'श्रीं ह्वीं सरस्वत्यै स्वाहा।' इसका चार लाख जप करने से मंत्र सिद्धि होती है।

आगम ग्रंथों में इनके कई मंत्र निर्दिष्ट हैं, जिनमें 'अं वाग्वादिनि वद वद स्वाहा।' यह सबीज दशाक्षर मंत्र सर्वार्थसिद्धिप्रद तथा सर्वविद्याप्रदायक कहा गया है। ब्रह्मवैवर्तपुराण में उनका एक मंत्र इस प्रकार है- 'ॐ ऐं ह्वीं श्रीं क्लीं सरस्वत्यै बुधजनन्यै स्वाहा।'

ऐसा उल्लेख आता है कि महर्षि व्यास जी की व्रतोपासना से प्रसन्न होकर ये उनसे कहती हैं- व्यास! तुम मेरी प्रेरणा से रचित वाल्मीकि रामायण को पढ़ो, वह मेरी शक्ति के कारण सभी काव्यों का सनातन बीज बन गया है। उसमें श्रीरामचरित के रूप में मैं साक्षात्‌ मूर्तिमती शक्ति के रूप में प्रतिष्ठित हूं-

पठ रामायणं व्यास काव्यबीजं सनातनम्‌। यत्र रामचरितं स्यात्‌ तदहं तत्र शक्तिमान॥

भगवती सरस्वती के इस अद्भुत विश्वविजय कवच को धारण करके ही व्यास, ऋष्यश्रृंग, भरद्वाज, देवल तथा जैगीषव्य आदि ऋषियों ने सिद्धि पाई थी। इस कवच को सर्वप्रथम रासरासेश्वर श्रीकृष्ण ने गोलोक धाम के वृंदावन नामक अरण्य में रासोत्सव के समय रासमंडल के वृंदावन नामक अरण्य में रासोत्सव के समय रासमंडल में ब्रह्माजी से कहा था।

तत्पश्चात ब्रह्माजी ने गंधमादन पर्वतपर भृगुमुनि को इसे दिया था। भगवती सरस्वती की उपासना (काली के रूप में) करके ही कवि कुलगुरु कालिदास ने ख्याति पाई। गोस्वामी जी कहते हैं कि देवी गंगा और सरस्वती दोनों एक समान ही पवित्रकारिणी हैं। एक पापहारिणी और एक अविवेक हारिणी हैं-

पुनि बंदउं सारद सुरसरिता। जुगल पुनीत मनोहर चरिता।
मज्जन पान पाप हर एका। कहत सुनत एक हर अबिबेका।

भगवती सरस्वती विद्या की अधिष्ठातृ देवी हैं और विद्या को सभी धनों में प्रधान धन कहा गया है। विद्या से ही अमृतपान किया जा सकता है। विद्या और बुद्धि की अधिष्ठात्‌ देवी सरस्वती की महिमा अपार है। देवी सरस्वती के द्वादश नाम हैं। जिनकी तीनों संध्याओं में इनका पाठ करने से भगवती सरस्वती उस मनुष्य की जिह्वा पर विराजमान हो जाती हैं।

गणतंत्र दिवस सैन्य परेड की चित्रमय झलकियां

63वें गणतंत्र दिवस पर अर्धसैनिक बलों और अन्य असैन्य बलों मसलन सीमा सुरक्षा बल, असम राइफल्स, तटरक्षक बल, केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस, केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल, सशस्त्र सीमा बल, रेलवे सुरक्षा बल, दिल्ली पुलिस, राष्ट्रीय कैडेट कोर और राष्ट्रीय सेवा योजना के दस्तों ने भी मार्च पास्ट में हिस्सा लिया।


नौसेना के दस्ते में लेफ्टिनेंट मणिकंदन के. के नेतृत्व में 148 जवानों और वायुसेना के दस्ते में फ्लाइट लेफ्टिनेंट स्नेहा शेखावटे के नेतृत्व में 144 अन्य जवानों ने राष्ट्रपति को सलामी दी।

खूबसूरत ऋतु वसंत की पवन द‍ीवानी

फूलों की खुशबू के बीच ठंड की हल्की-सी सुरसुरी छोड़ती हवा... दीवाना-सा हुआ जाता दुपट्टा और खुशियों की कोरस गाती पत्तियां... लीजिए जनाब... आ गया बौराने का मौसम। सिर पर मंडराते इम्तीहान के ख्याली हवाई जहाजों से होने वाली बौराहट... दिन में भी पलकों से आंख-मिचौली खेलती नींद से उपजी बौराहट... कोंपलों के साथ खिलती नर्म, मुलायम और प्यारी-सी छुअन से उपजी बौराहट... इस बौराहट में डूबी समूची प्रकृति। वसंत का यह समय सबको अपने रंग में रंग लेता है। आप चाहें या न चाहें हवा की छेड़छाड़ आपको भी एक अलग से नशे में तारी कर जाती है।

प्रकृति ने मनुष्य को उत्सव मनाने के लिए ढेर सारे मौके अपनी तरफ से भी दिए हैं। तेज बारिश में तर होकर पकौड़े खाना किसी उत्सव से कम नहीं और ठंड के दिनों में अलाव के आस-पास नाचने-गाने से बड़ा मजा कोई दूसरा नहीं। ठीक इसी तरह हल्की-सी ठंडक और गुनगुनी-सी धूप के कॉम्बिनेशन वाले मौसम यानी वसंत के दिनों को भी थोड़ी मस्ती और थोड़ी पूजा-पाठ के साथ मनाने का विधान है।

कलम आराधना का दिन
इस ऋतु में वसंत पंचमी के दिन को देवी सरस्वती की आराधना के दिन के रूप में भी मनाया जाता है। कई समाजों में इस दिन देवी सरस्वती की विधिवत पूजा कर उनसे ज्ञान का आलोक फैलाने की कामना की जाती है। खासतौर पर बंगाली समाज में यह दिन बेहद महत्वपूर्ण होता है। उस दिन देवी का पूजन कर, खिचुरी और पाएश (खिचड़ी और खीर) का प्रसाद बनाया और सबको खिलाया जाता है।

महिला-पुरुष तथा बच्चे सभी मिलकर सरस्वती देवी का आह्वान करते हैं, वहीं अन्य समाजों में लिखाई-पढ़ाई शुरू करने के लिहाज से भी इस दिन को शुभ माना जाता है और छोटे बच्चे को प्रथम बार अक्षर ज्ञान दिया जाता है। साहित्य तथा लेखन से जुड़े लोग भी इस दिन देवी सरस्वती की आराधना करते हैं।

रंग वसंत के
यूं तो मुख्यतौर पर पीला रंग इस मौसम से खास जुड़ाव रखता है, लेकिन उसके साथ मिलकर नारंगी, गुलाबी, लाल और अन्य रंग भी चारों ओर छा जाते हैं। यानी पीले और लाल रंग के कई शेड इस मौसम को और भी सुंदर बना देते हैं। पीले रंग के परिधान न केवल पूजा-पाठ की दृष्टि से पवित्र तथा शुभ रंगों में शुमार होते हैं, बल्कि मौसम के लिहाज से भी ये प्रकृति में घुल- मिल जाते हैं। पीले सरसों के फूलों से लदे खेत किसको नहीं मोहते भला? इसलिए वसंत रंगों से भरी ऋतु भी है, जिसके आगमन के साथ ही प्रकृति भी मुक्त हस्त से रंगों की छटा बिखेर देती है।

गीत गाते फूल-पत्ते
यह मौसम प्रकृति के आनंदोत्सव से जुड़ा है। इसलिए आपको ढेर सारे तरह-तरह के रंग-बिरंगे फूल अपने आस-पास हंसते-खिलखिलाते, आनंद मनाते दिखाई देंगे। पेड़ों पर खुशी, लय के साथ लहराती पत्तियां नए गीत गाती नजर आएंगी। हवाओं में एक अलग ही खुशबू तैरने लगेगी, जिसका असर आपके दिल-दिमाग पर छा जाएगा। शायद इसलिए ही इस मौसम का प्रेम प्रतीक के रूप में भी बखान किया जाता है।

आप भी मनाइए आनंद
जब आपके आस-पास जीवन के सारे रंग बिखरे पड़े हों और खुद प्रकृति भी उत्सव मनाने में मगन हो तो भला आप इस लहर से अछूते कैसे रह सकते हैं। शामिल हो जाइए फूलों के कोरस में, हवाओं के नृत्य में और आध्यात्म के हवन में। गुनगुनाइए, अपनों के संग हंसी के पल ढूंढिए और शहर की भीड़-भाड़ से दूर एक दिन किसी खेत के पास जाकर बिता आइए।

इतना भी मुश्किल हो तो घर की खिड़की के नजदीक चाय का प्याला लेकर बैठिए और कुछ देर हरी पत्तियों और फूलों की मौन गपशप को सुनने का समय निकाल लीजिए। इसके अलावा छुट्टी के दिन परिवार के साथ लॉन में या घर के किसी भी हवादार हिस्से में बैठकर भी प्रकृति के तरानों का मजा लिया जा सकता है।

याद रखिए मौसम तो कुछ महीनों में बदल जाएंगे, लेकिन दिल में बसे ये छोटे-छोटे खुशियों के पल और सुनहरी यादें तमाम उम्र आपके साथ रहेंगी... एक अमिट और अनमोल धरोहर बनकर।

शुभ कार्यों के लिए सर्वश्रेष्ठ दिन वसंत पंचमी कल

प्रत्येक वर्ष माघ माह की शुक्ल पक्ष की पंचमी को वसंत पंचमी के रूप में मनाया जाता है। देवी सरस्वती के इस प्राकट्य पर्व को सर्वसिद्धि दायक पर्व माना जाता है। वसंत पंचमी 28 जनवरी को है। माघ माह में जब सूर्य देवता उत्तरायण रहते हैं ऐसे में गुप्त नवरात्रि के मध्य पंचमी तिथि को लोक प्रसिद्ध स्वयंसिद्ध मुहूर्त के रूप में माना जाता है।

शास्त्रों के अनुसार यह दिन प्रत्येक शुभ कार्यों के लिए अतिश्रेष्ठ माना जाता है। प्रकृति के चितेरों, साहित्य मनीषियों और कवियों ने इस दिन को अपने-अपने तरीके से परिभाषित किया है। यह विद्या की अधिष्ठात्री देवी सरस्वती की पूजा-अर्चना का दिन है। इस तिथि को वागीश्वरी जयंती और श्रीपंचमी नाम से भी जाना जाता है।

शास्त्रों में कहा गया है कि यदि यौवन हमारे जीवन का वसंत है तो वसंत इस सृष्टि का यौवन है। गीता में भी कहा गया है कि वसंत ऋतु के रूप में भगवान कृष्ण प्रत्यक्ष रूप से प्रकट होते हैं।

तंत्र शास्त्रों के मुताबिक वसंत पंचमी को आकर्षण और वशीकरण के प्रयोग बहुत ही प्रभावी और शुभ फलदायी होते हैं। ज्योतिषीय दृष्टि से पांचवीं राशि के अधिष्ठाता भगवान सूर्य नारायण होते हैं इसलिए वसंत पंचमी अज्ञान का नाश करके प्रकाश की ओर ले जाती है। अबूझ मुहूर्त होने से इस दिन शादी-विवाह के लिए मुहूर्त की आवश्यकता नहीं होती।

विद्या और बुद्धि की देवी सरस्वती का प्राकट्य दिवस : ज्योतिषाचार्य पंडित धर्मेन्द्र शास्त्री के मुताबिक वसंत पंचमी के दिन देवी सरस्वती का विशेष पूजन किया जाता है। इस दिन विवाह, गृह प्रवेश, पद भार, विद्यारंभ, वाहन, भवन खरीदना आदि कार्य अतिशुभ और विशिष्ट होते हैं।

प्रत्येक कार्य का संचालन बुद्धि, विवेक और ज्ञान के आधार पर ही होता है इसलिए विद्या-बुद्धि की अधिष्ठात्री देवी मां सरस्वती के जन्मदिवस से किसी भी कार्य का शुभारंभ किया जाए तो वह कार्य सफल होगा।

आचार्य विनायक शास्त्री कहते है कि संवत्सर चक्र का परिवर्तन वसंत पंचमी पर्व का मुख्य हेतु है। यह ग्रीष्म और शीत का संधिकाल है। हमारी सारस्वत शक्तियों के पुनर्जागरण के लिए इस पर्व का विशेष महत्व है। सृष्टि का संयोग इसी दिन से प्रारंभ होता है। इसलिए इस दिन देवी सरस्वती और भगवान कृष्ण के साथ कामदेव व रति की पूजा की भी परंपरा है। इस माह को मधुमास भी कहा जाता है। सरस्वती को बुद्धि और ज्ञान के साथ ही संगीत एवं कला की देवी भी माना जाता है।

कुछ मुख्य बातें

माघ माह - इस माह को विष्णु का स्वरूप बताया गया है।
शुक्ल पक्ष - इस पक्ष में चंद्रमा प्रबल रहता है।
गुप्त नवरात्रि - सिद्धि साधना के लिए महत्वपूर्ण समय।
सरस्वती जयंती - पुराणों के अनुसार देवी सरस्वती इस दिन ब्रह्मा के मानस से अवतीर्ण हुई थीं।
मंत्र- ॐ ऐं ह्रीं क्लीं महासरस्वती देव्यै नमः।
उत्तरायण सूर्य - देवताओं का दिन।

सचिन फिर फ्लॉप, भारत पर हार का खतरा

टेस्ट सिरीज में पहले ही 0-3 से पीछे चल रही टीम इंडिया पर एडिलेड में खेले जा रहे चौथे टेस्ट में भी हार का खतरा मंडरा रहा है। टेस्ट के चौथे दिन का खेल खत्म होने तक भारत ने अपनी दूसरी पारी में छह विकेट के नुकसान पर 166 रन बना लिए हैं। रिद्दीमान साहा और ईशांत शर्मा क्रीज पर हैं।

ऑस्ट्रेलिया ने आज लंच के तुरंत बाद अपनी पारी पांच विकेट पर 167 रन पर घोषित कर दी। पहली पारी के आधार पर मेजबान टीम 332 रनों की लीड मिली थी। इस तरह भारत को एडिलेड टेस्ट जीतने के‍ लिए 500 रनों का विशाल लक्ष्य मिला।

खेल के अंतिम दिन भारत को जीत के लिए 334 रन बनाने हैं, जबकि उसके सिर्फ चार बल्लेबाज शेष हैं। हालात कुछ ऐसे बन गए हैं कि एडिलेड टेस्ट में भी भारत की हार साफ नजर आ रही है।

भारत की दूसरी पारी को ढहाने में स्पिनर नाथ लियोन और रियान हैरिस की खास भूमिका रही। लियोन ने तीन और हैरिस ने दो विकेट लिए।

ऑस्ट्रेलिया द्वारा दिए गए विशाल लक्ष्य का पीछा करते हुए भारत की शुरुआत अच्छी नहीं रही। उसके सलामी बल्लेबाज गौतम गंभीर मात्र 3 रन बनाकर रेयान हैरिस की गेंद पर आउट हो गए। उन्हें विकेट के पीछे ब्रेड हैडिन ने लपका। गंभीर के आउट होने के बाद सहवाग ने धमाकेदार बल्लेबाजी का प्रदर्शन करते हुए अपना अर्धशतक पूरा किया। वे 63 रन बनाकर नैथन लियोन की गेंद पर आउट हो गए। इसके बाद राहुल द्रविड़ भी 25 रन बनाकर हैरिस की गेंद पर माइकल हसी को कैच थमा बैठे।

सचिन तेंडुलकर से एक बार फिर उम्मीद थी कि वे जरूरत के समय टीम के लिए रन बनाएंगे, लेकिन उन्होंने करोड़ों क्रिकेट प्रेमियों को फिर निराश किया। सचिन केवल 13 रन बनाने के बाद लियोन की गेंद पर फॉरवर्ड शॉर्टलेग पर पर एड कोवान को कैच थमा बैठे।

110 रनों पर चार विकेट गिर जाने के बाद विराट कोहली और वीवीएस लक्ष्मण ने पांचवें विकेट के लिए 52 रन जोह़े। जब लग रहा था कि दिन का खेल खत्म होने तक भारत अब और विकेट नहीं गंवाएगा, तब लक्ष्मण लियोन की गेंद पर शान मार्श को कैच थमा बैठे। अंतिम ओवरों में कोहली भी गैरजिम्मेदाराना तरीके से रन आउट हो गए। लक्ष्मण ने 35 और कोहली ने 22 रन बनाए।

झांकियों में रहा पंजाब का दबदबा

गणतंत्र दिवस पर इस बार झांकियों में पंजाब का दबदबा देखने को मिला। राज्यों की झांकी में पंजाब ने शेर-ए-पंजाब रणजीत सिंह को मुख्य विषय बनाया तो रेल मंत्रालय की झांकी ‘पंजाब मेल’ पर आधारित थी।


राज्यों की झांकी में पंजाब ने इस बार शेर-ए-पंजाब महराजा रणजीत सिंह पर अपनी झांकी प्रस्तुत की। झांकी को लाहौर के किले का रूप दिया गया था और उस पर शेर-ए-पंजाब महाराजा रणजीत सिंह की विशाल प्रतिमा सजाई गयी थी। उनकी छवि को तैयार करने में बारिकियों का ध्यान रखा गया था।

इसके साथ पैदल सेना, अश्वरोही और हाथियों पर सवार सेना के साथ महराजा रणजीत सिंह के सैन्य प्रशासन के प्रदर्शन को भी शामिल किया गया था। रंगों के शाही वैभव के बीच सभी तत्वों को मिलाकार समग्र पंजाब के समर्थ शूरवीर शासक के चरित्र को उभारा गया था।

रेलवे ने भी अपनी झांकी इस बार पंजाब के नाम रखी। रेलवे ने ‘पंजाब मेल-तब और अब’ नाम से अपनी झांकी प्रस्तुत की। पंजाब मेल भारतीय रेल की ऐसी पहली रेलगाड़ी है जो अपने 100वें वर्ष में पदार्पण कर रही है। इस ट्रेन को 1912 में शुरू किया गया था।

वो दौर गया जब पंजाब मेल भाप इंजन से चलाई जाती थी, अब इसे डीजल और बिजली के रेल इंजनों से चलाया जाता है। यह रेलगाड़ी छह राज्यों से गुजरते हुए अपने साथ विभिन्न प्रांतों की महक समेटते हुए 'देश का मेल...भारतीय रेल' का संदेश जन-जन तक पहुंचाती है।

अन्ना हजारे बने मुंबई के ‘हीरो’

भ्रष्टाचार के विरूद्ध लड़ाई लड़ रहे गांधीवादी कार्यकर्ता अन्ना हजारे को मतदान के जरिए ‘मुंबई का हीरो’ चुना गया। गेटवे ऑफ इंडिया पर हुए इस मतदान में सभी को शामिल होने की छूट थी।

‘मुंबई का हीरो कौन’ शीषर्क से हुए इस मतदान का आयोजन ‘इंडिया अगेन्स्ट करप्शन’ की मुंबई शाखा ने किया था। आईएसी के मीडिया समन्वयक पीयूष भाटिया ने बताया कि तीन घंटे में कुल 5,181 लोगों ने मत दिया।

मतदाताओं के पास हजारे के अलावा विकल्प के तौर पर शिव सेना प्रमुख बाल ठाकरे, कांग्रेस के महासचिव राहुल गांधी, एनसीपी प्रमुख शरद पवार, एमएनएस अध्यक्ष राज ठाकरे और भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी का नाम था।

उन्होंने बताया कि इनमें से कोई भी हजारे के आसपास भी नहीं पहुंच पाया। हजारे को 4,241 मत मिले।

अग्निपथ ने तोड़ा बॉडीगार्ड का रिकॉर्ड

अग्निपथ ने कमाल कर दिया। पहले दिन सबसे ज्यादा कमाई करने का रिकॉर्ड बॉडीगार्ड के नाम था। इस‍ फिल्म ने अपने पहले दिन 21 करोड़ रुपये की कमाई की थी। अग्निपथ ने 25 करोड़ रुपये पहले दिन कमाए।
अग्निपथ


एक ही दिन में सबसे ज्यादा कमाई करने का कीर्तिमान रा.वन के नाम पर है। इस फिल्म ने अपने दूसरे दिन 25.10 करोड़ रुपये कमाए थे। संभव है कि यह रिकॉर्ड भी अग्निपथ के नाम पर आ जाए क्योंकि पहले दिन के कुछ जगह के आंकड़े अभी आना बाकी है।

इस फिल्म के बारे में सभी को अनुमान था कि यह बॉक्स ऑफिस पर जोरदार शुरुआत लेगी और फिल्म ने उम्मीद से बेहतर शुरुआत की। 26 जनवरी की छुट्टी का लाभ भी इसको मिला। हालांकि फिल्म के लंबे होने की वजह से मल्टीप्लेक्सेस में इसके कम शो हुए, लेकिन इसे ज्यादा प्रिंट्स के साथ रिलीज किया गया।

रितिक रोशन की किसी भी फिल्म को इतनी बेहतरीन ओपनिंग नहीं मिली। अब यह बात तय है कि अग्निपथ 100 करोड़ रुपये से ज्यादा कमाई करेगी। ऐसा करने वाली यह रितिक की पहली फिल्म होगी। इसके पहले आमिर सलमान, शाहरुख और अजय देवगन की फिल्में सौ करोड़ से ज्यादा की कमाई कर चुकी हैं।

हेमा मालिनी ने मांगे पंजाब में वोट

खुद को पंजाब की भाभी करार देते हुए भाजपा की नेता तथा सिने अभिनेत्री हेमा मालिनी ने बुधवार को यहां कहा है कि वे पार्टी के पक्ष में चुनाव प्रचार करने आई हैं और वोट मांगने आई हैं इसलिए लोग ‘भाभी की इस मांग को पूरा करने के लिए’ उनकी बात की लाज रखें।

जालंधर उत्तर के भाजपा उम्मीदवार के पक्ष में चुनाव प्रचार करने यहां आई हेमा मालिनी ने अपने दो मिनट के संक्षिप्त संबोधन में लोगों से कहा कि मैं पंजाब की भाभी हूं। मैं यहां पार्टी के लिए वोट मांगने आई हूं। मेरी बात की लाज रखते हुए आप पार्टी उम्मीदवार को वोट देकर जिताएं तथा फिर से गठबंधन की सरकार बनाएं।

उन्होंने कहा कि अगर आप विकास चाहते हैं तो मौजूदा सरकार को फिर से लाना होगा और इसके लिए भाभी की बात आपको माननी होगी।

हेमा ने यह भी कहा कि मौजूदा सरकार ने विकास की कई परियोजनाएं शुरू की है। उन परियोजनाओं को पूरा करने के लिए जरूरी है कि आप इस सरकार को एक बार फिर से मौका दें। अगर ऐसा नहीं हुआ तो ये परियोजनाएं कभी पूरी नहीं होंगी।

उन्होंने यह भी कहा कि पंजाब के विकास के लिए, गरीबों और वंचितों के विकास के लिए तथा प्रदेश को देश में नंबर एक बनाने के लिए सबसे अच्छी और विकास करने वाली इस सरकार को दोबारा मौका दें।

टूटी तालिबान की रीढ़, अलकायदा आतंकी भी डरे


अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा कि तालिबान की रीढ़ टूट गई है और अलकायदा के शेष उग्रवादी अमेरिका से बचने के लिए छिपते फिर रहे हैं। कांग्रेस को ओबामा ने अपने ‘स्टेट ऑफ द यूनियन’ संबोधन में कहा कि चरमपंथी संगठनों को यह झटका इराक में युद्ध की समाप्ति और पूरी तरह केंद्रित प्रयासों की वजह से लगा है।
* पहले से अधिक सुरक्षित हुआ अमेरिका
* अफगानिस्तान से लौटे 10 हजार अमेरिकी सैनिक
* पाकिस्तान से यमन तक छिपते फिर रहे हैं आतंकी

उन्होंने कहा कि इराक युद्ध की समाप्ति के बाद हमे हमारे शत्रुओं के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई का मौका मिला। पाकिस्तान से यमन तक, अलकायदा के उग्रवादी जानते हैं कि वह अमेरिका की पहुंच से बच नहीं सकते। हालांकि वह बचने के लिए छिपते फिर रहे हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि हमने अफगानिस्तान से सैनिकों को वापस बुलाना शुरू कर दिया है। हमारे 10,000 सैनिक लौट चुके हैं। इस साल गर्मी के खत्म होते तक 23,000 और सैनिकों को वापस बुला लिया जाएगा।

उन्होंने कहा कि अफगानों के नेतृत्व में बागडोर सौंपने तक यह बदलाव जारी रहेगा और हम अफगानिस्तान के साथ स्थायी भागीदारी तैयार करेंगे ताकि वह फिर कभी भी अमेरिका के खिलाफ हमलों का केंद्र न बन सके।

व्हाइट हाउस से कैपिटॅल हिल जाने के बाद ओबामा ने सांसदों से कहा कि नायकों की इस पीढ़ी ने अमेरिका को सुरक्षित तथा दुनिया भर में और अधिक सम्मानित बना दिया है।

उन्होंने कहा कि नौ साल में पहली बार इराक में कोई अमेरिकी सैनिक नहीं लड़ रहा है। दो दशक में पहली बार इस देश के लिए ओसामा बिन लादेन खतरा नहीं है। अलकायदा के ज्यादातर शीर्ष उग्रवादी परास्त हो चुके हैं। तालिबान की रीढ़ टूट गई है और अफगानिस्तान में मौजूद हमारे सैनिकों की घर वापसी शुरू हो गई है।

राष्ट्रपति ने कहा कि यह उपलब्धियां हमारे साहस, निस्वार्थ कार्य और अमेरिकी शस्त्र बलों के टीमवर्क की परिचायक हैं। हमारे संस्थान निजी महत्वाकांक्षाएं नहीं पालते और न ही मतभदों में उलझते हैं। उनका ध्यान अपने मिशन पर रहता है और वे मिलजुलकर काम करते हैं।

अमेरिका एक अत्यावश्यक देश : ओबामा ने कहा कि अमेरिका वैश्विक मामलों के संदर्भ में एक अत्यावश्यक देश बना हुआ है और जो लोग इसकी शक्ति घटने की बात कहते हैं वह नहीं जानते कि वह क्या कह रहे हैं। जब तक मैं राष्ट्रपति हूं, तब तक मेरा इरादा यह स्थिति बनाए रखने का है।

ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकेंगे : राष्ट्रपति ने कहा है कि अमेरिका ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के लिए अडिग है और तेहरान के खिलाफ कोई भी विकल्प छिपा हुआ नहीं है। हालिया सप्ताहों में दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ा है।

हजारिका, धर्मेंद्र सहित 109 हस्तियों को पद्म पुरस्कार



दिवंगत संगीतकार भूपेन हजारिका, पूर्व राज्यपाल टीवी राजेश्वर, अभिनेता धर्मेन्द्र और शबाना आजमी, फिल्म निर्देशक मीरा नायर, भजन गायक अनूप जलोटा, उद्योगपति स्वाति पीरामल, पूर्व केन्द्रीय सतर्कता आयुक्त एन. विटटल, राजनयिक रोनेन सेन, शास्त्रीय गायक गुंडेचा बंधु और पेंटर जतिन दास सहित कुल 109 नामचीन हस्तियों को इस साल के पद्म पुरस्कारों से सम्मानित किया जाएगा।

पद्म पुरस्कार विजेताओं की सूची

राष्ट्रपति प्रतिभा देवीसिंह पाटिल मार्च-अप्रैल में राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में ये पुरस्कार वितरित करेंगी। इस साल पांच पदम विभूषण, 27 पदम भूषण और 77 पदमश्री पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे।

देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान पदम पुरस्कार समाज सेवा, सार्वजनिक मसलों, विज्ञान इंजीनियरिंग, व्यापार उद्योग, चिकित्सा, साहित्य, शिक्षा, खेल, सिविल सेवा आदि क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान करने वालों को प्रदान किए जाते हैं।

इन पुरस्कारों की घोषणा हर साल गणतंत्र दिवस के मौके पर होती है। पद्म विभूषण पाने वालों में दिवंगत संगीतकार भूपेन हजारिका और कार्टूनिस्ट मारियो डी मिरांडा भी शामिल हैं।

पद्म भूषण पाने वालों में मशहूर कार्डियोलाजिस्ट देवीप्रसाद शेट्टी का नाम है, जबकि वन्य जीव संरक्षक उल्लास कारंत, पूर्व हॉकी कप्तान ज़फर इकबाल, महिला क्रिकेट कप्तान झूलन गोस्वामी, तीरंदाज लिम्बाराम, संगीतकार वनराज भाटिया और दिवंगत होम्योपैथ डॉ. जुगल किशोर को पदमश्री से सम्मान दिए जाने की घोषणा की गई।

लजीज तिरंगा केक



सामग्री :
ब्रेड एक बड़ा पैकेट, एक आम, मलाई एक कटोरी, पिसी हुई शक्‍कर एक कटोरी, गुलाब जल एक चम्मच, सजाने के लिए काजू, किशमिश, बादाम, जैम आवश्यकतानुसार।

विधि :
सर्वप्रथम मलाई में आधा कटोरी शक्‍कर व गुलाब जल मिलाकर इसे अच्‍छी तरह फेंटे। बाकी बची हुई शक्‍कर आम में मिलाकर उसे फेंटें। अब किसी प्लेट में एक ब्रेड रखें, उस पर आम का मिश्रण फैलाएं, इस पर दूसरी ब्रेड रखकर मलाई का मिश्रण फैलाएं। अब उसके ऊपर ब्रेड की तीसरी स्‍लाइस रखकर उस पर जैम लगाएं।

इसी प्रकार चौथी ब्रेड रखकर मलाई का मिश्रण लगाएं। अब सजाववट हेतु काजू, किशमिश आदि चिपकाएं तथा इसे केक की तरह बीच से दो भागों में काट लें। अब यह तीन रंगों का दिखेगा। लीजिए लजीज तिरंगा केक तैयार है।

राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल का राष्ट्र के नाम संबोधन

हर बात पर शंका करने की प्रवृत्ति पर चिन्ता का इजहार करते हुए राष्ट्रपति प्रतिभा देवीसिंह पाटिल ने बुधवार को कहा कि हो सकता है हमारी संस्थाएं दोषरहित न हों, लेकिन इन संस्थाओं ने कई चुनौतियों का सामना किया है और इनमें किसी तरह का बदलाव लाने के लिए पूरी सतर्कता बरतना आवश्यक है।
* पेड़ को इतना न हिलाएं कि वह गिर पड़े * गौरवपूर्ण है भारत का लोकतांत्रिक रिकॉर्ड
* हिंसा और नकारात्मकता उचित नहीं * गरीबी, निरक्षरता मिटाना बड़ी प्राथमिकता
* हर मुल्क बाहरी घटनाक्रम से प्रभावित * हमारा भूतकाल भविष्य के लिए मार्गदर्शक
* जीवन शैली बदली, भौतिकवाद की इच्छा बढ़ी * कृषि में साझेदारी मॉडल की जरूरत
राष्ट्रपति ने देश के 63वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में कहा कि संस्थाओं में सुधार करते समय हमें इस बात से सतर्क होना पड़ेगा कि खराब फलों को गिराने के लिए पेड़ को इतना भी न हिला दिया जाए कि पेड़ ही नीचे आ गिरे। उन्होंने कहा कि अल्पकालिक दबाव होंगे, लेकिन इस प्रक्रिया में दीर्घकालिक लक्ष्यों से नजर नहीं हटनी चाहिए। हमें महत्वपूर्ण राष्ट्रीय एजेंडा पर मिल-जुलकर काम करना चाहिए।

प्रतिभा पाटिल ने कहा कि भारत अपने लोकतांत्रिक रिकॉर्ड को लेकर गौरव कर सकता है, लेकिन जैसा कि किसी भी सक्रिय लोकतंत्र में होता है, उसे दबावों और चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। लोकतंत्र का एक महत्वपूर्ण पहलू नजरियों की अभिव्यक्ति है। अनवरत वार्ता की यह प्रक्रिया इस प्रकार चलनी चाहिए कि हम एक दूसरे को सुनने के लिए तैयार रहें। जो लोग लोकतंत्र में भरोसा करते हैं, उन्हें अन्य लोगों के नजरिए के तर्क को देखना चाहिए।

राष्ट्रपति ने कहा कि हम अकसर तत्परता से दूसरों को दोषी ठहरा देते हैं, लेकिन सकारात्मक जवाब नहीं दे पाते। ऐसा लगता है कि हर चीज पर शंका करने की प्रवृत्ति सी हो गई है। क्या हमें अपनी जनता और संस्थाओं की क्षमता में आस्था नहीं है। क्या हम अपने ही बीच अविश्वास का जोखिम उठा सकते हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्र का निर्माण बड़े संयम और कुर्बानियों से होता है और भारत जैसे विशाल देश के लिए फूट नहीं बल्कि एकता ही सही रास्ता है।

प्रतिभा पाटिल ने कहा कि सभी मुद्दों का समाधान वार्ता के जरिए होना चाहिए और हिंसा के लिए कोई जगह नहीं है। नकारात्मकता और अस्वीकार्यता अपनी नियति की ओर बढ़ते एक गतिशील देश का रास्ता नहीं हो सकतीं।

उन्होंने कहा कि हो सकता है कि हमारी संस्थाएं दोषरहित न हों, लेकिन इन संस्थाओं ने कई चुनौतियों का सामना किया है। हमारी संसद ने नई राहें निकालने वाले कई कानून बनाएं। हमारी सरकारों ने जनता की प्रगति और कल्याण के लिए योजनाएं बनाईं। हमारी न्यायपालिका की एक सम्मानजनक स्थिति है और हमारे मीडिया ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

राष्ट्रपति ने कहा कि सभी संस्थाएं एक ही राष्ट्रीय उद्देश्य के लिए मिलकर काम कर रही हैं इसीलिए सकारात्मक उर्जा का संचार होगा। उन्होंने उम्मीद जतायी कि देश हित की भावना, राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर चर्चा होगी और अलग-अलग पक्षों के बीच समाधान निकलेगा। इससे हमारे लोकतंत्र की जड़ें और देश की आधारशिला मजबूत होगी ।

प्रतिभा पाटिल ने कहा कि हमारा साझा भविष्य है और हमें भूलना नहीं चाहिए कि इस भविष्य को तभी हासिल किया जा सकता है, जब हम जिम्मेदारी की भावना और एकता का परिचय दें।

राष्ट्रपति ने कहा कि संविधान हमारा दिशासूचक होना चाहिए और उससे राष्ट्रनिर्माण का मार्गदर्शन मिलना चाहिए। यही हमारे लोकतंत्र का घोषणापत्र है। यही वह दस्तावेज है, जो हर नागरिक को व्यक्तिगत आजादी की गारंटी देता है। यही वह आधार है, जिस पर देश की संस्थाएं बनाई गईं और जिससे उन्हें अधिकार और कार्यप्रणाली हासिल हुई।

उन्होंने कहा कि सामाजिक और आर्थिक एजेंडा पर आगे बढने के लिए काफी जोरदार कार्य करने की आवश्यकता है ताकि त्वरित आर्थिक एवं टिकाऊ विकास हासिल हो सके।

राष्ट्रपति ने कहा कि हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता गरीबी, भूख और कुपोषण, रोग और निरक्षरता मिटाना होनी चाहिए। सभी सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों का कार्यान्वयन प्रभावशाली ढंग से होना चाहिए। सेवाएं प्रदान कर रही एजेंसियों में कर्तव्य को लेकर जबरदस्त भावना होनी चाहिए और उन्हें पारदर्शी, भ्रष्टाचार मुक्त, समयबद्ध तथा जवाबदेही वाले ढंग से कार्य करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि हम ऐसी दुनिया में रह रहे हैं, जो पेचीदा और चुनौती भरी है। वैश्वीकरण की ताकतों ने परस्पर जुडी और एक दूसरे पर आश्रित दुनिया तैयार की हैं। कोई देश अलग-थलग नहीं है। हर मुल्क बाहरी घटनाक्रम से लगातार प्रभावित हो रहा है।

प्रतिभा पाटिल ने कहा कि सभी देश चाहे विकसित हों या विकासशील, किसी न किसी रूप में वैश्विक आर्थिक अस्थिरता और बेरोजगारी एवं महंगाई के प्रभाव का सामना कर रहे हैं उन्होंने कहा कि जनता की आकांक्षाएं बढ़ रही हैं और यह तत्काल समाधान की उम्मीदों से जुडी होती हैं। हम देख रहे हैं कि सूचना की दुनिया में क्रान्ति हुई है और नई से नई प्रौद्योगिकीय खोजें हो रही हैं। इन्होंने जीवन शैली को बदल दिया है और भौतिकवाद की इच्छा बढ़ रही है। ये सवाल निरंतर बना हुआ है कि विकास और संसाधनों को किस तरह से अधिक से अधिक बराबरी के आधार पर बांटा जा सके ।

प्रतिभा पाटिल ने कहा कि भारत के लिए यही सीख होगी कि कैसे एक प्राचीन सभ्यता और एक युवा राष्ट्र ऐसे आगे बढ़े कि अपनी नियति हासिल कर सके। उन्होंने कहा कि हम एक ऐसा भारत चाहते हैं, जिसमें बराबरी और न्याय हो। हम लोकतंत्र, कानून के राज और मानव मूल्यों को एक मजबूत राष्ट्र बनाने के रूप में देखते हैं। हम अपनी जनता में वैज्ञानिक एवं प्रौद्योगिकीय नजरिया चाहते हैं। हम भारत को एक ऐसे देश के रूप में देखते हैं, जो वैश्विक मंच पर नैतिक बल को बढ़ावा देता रहे।

राष्ट्रपति के मुताबिक वे मानती हैं कि भारत के इस नजरिये के पीछे एकता है, लेकिन कभी-कभी विपरीत दबावों के चलते ध्यान भटक जाता है। हमें अपने देश और इसकी जनता के निर्माण में कैसे आगे बढ़ना है? मुझे लगता है कि जवाब हमारे प्राचीन मूल्यों, आजादी के आंदोलन के आदर्शों, संविधान के सिद्धांतों के साथ-साथ हमारी एकता, सकारात्मक नजरिये और विकास करने की अकांक्षा में छिपा है। उन्होंने कहा कि भारत की विदेश नीति का लक्ष्य ऐसा माहौल प्रोत्साहित करना है, जो इसके सामाजिक आर्थिक बदलाव के लिहाज से अनुकूल हो।

उन्होंने कहा कि हम दुनिया के सभी मुल्कों के साथ सहयोग और दोस्ती का पुल बनाना चाहते हैं। वैश्विक चुनौतियों का जवाब हासिल करने के लिए हम अंतररष्ट्रीय समुदाय के साथ रचनात्मक रूप से जुडना चाहते हैं। भारत की भूमिका और स्तर लगातार बढ़ रहा है और हमारा देश दुनिया के देशों के दर्जे की सीढ़ी पर ऊपर चढ़ता जा रहा है।

राष्ट्रपति ने कहा कि हमारा भूतकाल भविष्य के लिए अनिवार्य मार्गदर्शक बनता है। इसी परिप्रेक्ष्य में उन्होंने गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर की पंक्तियों का स्मरण किया, जिसका आशय है कि हर महान आदमी अपने इतिहास को इतना मूल्यवान इसलिए बनाकर रखता है कि उसमें न सिर्फ यादें बल्कि उम्मीदें भी हों ताकि भविष्य की तस्वीर बन सके। भारत का भूतकाल शानदार रहा है और ऐसा ही भविष्य भी होना चाहिए।

कृषि क्षेत्र के बारे में उन्होंने कहा कि यह एक ऐसा क्षेत्र है, जिसका अर्थव्यवस्था के अन्य क्षेत्रों के साथ एकीकरण अभी अपर्याप्त है। हमें साझेदारी के मॉडल को देखने की जरूरत है। किसानों की उद्योग के साथ और विभिन्न गतिविधियों में अनुसंधान एवं विकास संस्थानों के साथ साझेदारी ताकि न सिर्फ उत्पादन बढे बल्कि किसानों को लाभ भी हो।

राष्ट्रपति ने कहा कि उनका मानना है कि महिलाओं को राष्ट्र की मुख्य धारा में पूर्ण रूप से जोड़ा जाना चाहिए। इसका महिला सशक्तिकरण का स्थिर सामाजिक ढांचा तैयार करने में बड़ा प्रभाव पड़ेगा।

भारतीय टीम 272 पर ढेर, ऑस्ट्रेलिया मजबूत

पीटर सिडल के पांच विकेट की बदौलत आस्ट्रेलिया ने विराट कोहली के पहले टेस्ट शतक के बावजूद भारत को चौथे और अंतिम क्रिकेट टेस्ट के तीसरे दिन पहली पारी में सिर्फ 272 रन पर समेट दिया। मेजबान टीम ने दूसरी पारी में 50 रन पर तीन विकेट गंवा दिए हैं लेकिन कुल 382 रन की बढ़त के साथ मैच पर शिकंजा कस लिया है।

कोहली ने 213 गेंद में 11 चौकों और एक छक्के की मदद से 116 रन बनाए और वह आउट होने वाले अंतिम बल्लेबाज रहे। कोहली और रिद्धिमान साहा (35) की युवा जोड़ी ने छठे विकेट के लिए उस समय 114 रन की साझेदारी की जब भारत सिर्फ 111 रन पर अपने पांच विकेट गंवा चुका था।

मौजूदा श्रृंखला में कोहली भारत की ओर से शतक जड़ने वाले पहले बल्लेबाज हैं जबकि यह भारत की दूसरी सबसे बड़ी साझेदारी है। सचिन तेंडुलकर और राहुल द्रविड़ ने मेलबोर्न में पहले टेस्ट में तीसरे विकेट के लिए 117 रन जोड़े थे।

ऑस्ट्रेलिया की ओर से तेज गेंदबाज पीटर सिडल ने 49 रन देकर पांच जबकि बेन हिलफेंहास ने 62 रन देकर तीन विकेट चटकाए।

ऑस्ट्रेलिया ने अपनी पहली पारी सात विकेट पर 604 रन बनाकर घोषित की थी लेकिन भारत के पहली पारी के आधार पर 332 रन से पिछड़ने के बावजूद उसने फालोआन नहीं दिया। ऑस्ट्रेलिया ने इसके साथ ही श्रृंखला में लगातार तीसरी बार पारी की जीत दर्ज करने का मौका भी गंवा दिया।

मेजबान टीम ने अपनी दूसरी पारी में सलामी बल्लेबाजों डेविड वार्नर (28) और एड कोवान (10) तथा शान मार्श (00) के विकेट गंवा दिए हैं। पहली पारी में चौथे विकेट के लिए रिकार्ड 386 रन जोड़ने वाले कप्तान माइकल क्लार्क नौ जबकि रिकी पोंटिंग एक रन बनाकर क्रीज पर डटे हुए हैं।

वार्नर ने आक्रामक रवैया अपनाते हुए 39 गेंद की अपनी पारी में चार चौके मारे। मार्श की खराब फार्म इस पारी में भी जारी रही और वह मौजूदा श्रृंखला के चार टेस्ट की छह पारियों में 2.83 की औसत से केवल 17 रन बना पाए हैं।

अश्विन ने कोवान को पगबाधा आउट करके भारत को तीसरी सफलता दिलाई लेकिन पोंटिंग और क्लॉर्क ने इसके बाद टीम इंडिया को सफलता हासिल नहीं करने दी।

इससे पहले आज सुबह दो विकेट पर 61 रन से आगे खेलने उतरे भारत की शुरूआत खराब रही। उसने सुबह 30 ओवर में 61 रन जोड़कर तीन विकेट गंवा दिए। दूसरे सत्र में भारत ने 33.4 ओवर में 103 रन जोड़े जबकि चाय से पहले की अंतिम गेंद पर साहा का विकेट गंवाया।

कागज पर मजबूत दिखने वाले भारत के बल्लेबाजी क्रम ने एक बार फिर निराश किया और अगर कोहली और साहा टीम को नहीं संभालते तो उसकी हालत और खराब होती। सुबह सिडल ने भारत को दो झटके दिए जबकि वीवीएस लक्ष्मण (18) को ऑफ स्पिनर नाथन लियोन ने पैवेलियन की राह दिखाई।

सिडल ने चार ओवर के अपने पहले स्पैल में 16 रन देकर कल के नाबाद बल्लेबाजों सचिन तेंडुलकर (25) और गौतम गंभीर (34) की पारी का अंत किया। ऑस्ट्रेलिया ने सुबह रेयान हैरिस और हिलफेंहास के साथ शुरुआत की जबकि सिडल को पहले बदलाव के तौर पर गेंदबाजी करने उतारा।

गणतंत्र दिवस पर भारत ने दिखाई सैन्य ताकत दिल्ली चाक-चौबंद, राष्ट्रपति ने फहराया तिरंगा

भारत की राजधानी दिल्ली के राजपथ पर गणतंत्र दिवस की परेड के दौरान भारतीय सेना ने अपनी ताकत दिखाई। भारत की पहली महिला राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने तिरंगा फहराया और वे परेड की सलामी ले रही हैं। जहां पूरा राजपथ तिरंगे के रंग में रंग गया है वहीं सैन्य परेड और संस्कृतिक विविधता की ताकत को देखने के लिए थाइलैंड की प्रधानमंत्री मौजूद हैं।



*63वें गणतंत्र दिवस का रंगारंग समारोह
*1950 को लागू हुआ था भारत का संविधान
*थलसेना और वायुसेना की तैनाती
*मुख्य अतिथि थाइलैंड की प्रधानमंत्री

*इस वर्ष गणतंत्र दिवस समारोह की मुख्य अतिथि थाईलैंड की पहली महिला प्रधानमंत्री यिंगलक शिनवात्रा हैं।
*शहीद ले. जनरल नवदीप सिंह को मरणोपरांत अशोक चक्र दिया गया। नवदीप सिंह कश्मीर में आतंकवादियों से लड़ते हुए शहीद हो गए थे।

राज्यों की रंगारंग झांकियां : राजपथ से ऐतिहासिक लालकिल तक गुरुवार को निकली परंपरागत गणतंत्र दिवस परेड के दौरान विभिन्न झांकियों के जरिए दुनिया की सबसे अधिक सांस्कृतिक विविधता वाले देश भारत की संस्कृति, कला, संगीत, नृत्य और त्योहारों आदि का अद्भुत संगम देखने को मिला।

बिहार की झांकी में धरहारा परंपरा के माध्यम से परिवार में बेटियों के महत्व एवं स्थान को दर्शाया गया। इस परंपरा के तहत किसी परिवार में लड़की पैदा होने पर 10 फलदार वृक्ष लगाने की परंपरा है।

पश्चिम बंगाल की झांकी नोबेल पुरस्कार से सम्मानित कवि गुरू रवींद्र नाथ टैगोर को समर्पित थी जिसमें उनके द्वारा स्थापित शांति निकेतन को दर्शाया गया। जम्मू-कश्मीर ने श्रीनगर के स्थापत्यकला एवं धरोहर की झांकी पेश की तो छत्तीसगढ़ की झांकी में मिट्टी का काम करने वाले कलाकारों की पारंपरिक जिंझारी और डोंडाकी कला को प्रस्तुत किया गया।

राजपथ से ऐतिहासिक लालकिले तक सड़क के दोनों ओर खचा-खच भरे लोगों ने भारत की सांस्कृतिक विविधता को खूब सराहा। इनमें बड़ी संख्या में विदेशी भी थे। राजपथ पर राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल के साथ सलामी मंच पर बैंठी इस वर्ष की गणतंत्र दिवस परेड की खास मेहमान थाइलैंड की प्रधानमंत्री यिंगलक शिनावात्रा ने इन झांकियों में काफी उत्सुकता दिखाई।

महाराष्ट्र की झांकी में राज्य के ऐतिहासिक स्थलों प्राकृतिक आश्चर्यो, स्मारकों, पर्यटन स्थलों के दृश्यों की झलक देखने को मिली।

समुद्र की गोद में बसे गोवा की झांकी में वहां के लोगों के उल्लास और मस्ती भरी प्रकृति को उकेरती गोवा कार्निवल का प्रदर्शन किया गया। कर्नाटक की झांकी में प्राचीन सांस्कृतिक परंपरा एवं पूजा ‘भूताराधाने’ को साकार किया गया जबकि मेघालय की झांकी में जैंतिया त्योहार को जीवंत किया। राजस्थान की झांकी में अमेर के भव्य किला को दर्शाया गया जबकि असम की झांकी में ‘भोरताल नृत्य’ को प्रस्तुत किया गया। पंजाब की झांकी में शेर ए पंजाब महाराज रंजीत सिंह की महिमा देखने को मिली।

सामुदायिक भावना के लिए संयुक्त राष्ट्र से पुरस्कृत नगालैंड की झांकी में आपसी भाईचारे को दिखाया गया, वहीं किरत खाम्बू राय समुदाय के मनाए जाने वाले साकेवा त्योहार का प्रदर्शन सिक्किम की झांकी के जरिए हुआ।

इसी प्रकार, कपड़ा मंत्रालय की झांकी में हस्तशिल्प, मानव संसाधन विकास मंत्रालय की झांकी में साक्षर भारत, आदिवासी मामलों के मंत्रालय द्वारा आदिवासी सशक्तिकरण, सीपीडल्यूडी की झांकी में बर्फ की घाटी, चुनाव आयोग की झांकी में राष्ट्रीय मतदाता दिवस और वित्त मंत्रालय की झांकी में आर्थिक मोचरे को मजबूत करने के लिए उठाये गए कदमों का प्रदर्शन किया गया।

गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान कृषि मंत्रालय की झांकी में कृषि क्षेत्र के विविधिकरण, इस्पात मंत्रालय की झांकी में इस्पात के राष्ट्र को मजबूत बनाने, संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की झांकी में राष्ट्रीय ई प्रशासन और रेल मंत्रालय की झांकी में पंजाब मेल का प्रदर्शन किया गया।

इस बार की परेड में 23 राज्यों और केन्द्रीय मंत्रालयों एवं विभागों की झाकियां देश की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी झांकियों का प्रदर्शन किया गया । राष्ट्रीय बहादुरी पुरस्कार 2009 के लिए चुने गए 24 बच्चों में से 19 परेड में हिस्सा लिया।

इस बार की परेड में 23 राज्यों और केन्द्रीय मंत्रालयों एवं विभागों की झांकियों के जरिए देश के विकास और ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत से जुड़े पहलुओं का प्रदर्शन किया गया। राष्ट्रीय बहादुरी पुरस्कार 2009 के लिए चुने गए 24 बच्चों में से 19 परेड में हिस्सा लिया। दिल्ली के दो स्कूलों के 1200 छात्र-छात्राओं और विभिन्न सांस्कृतिक केन्द्रों के कलाकारों ने रंगारंग प्रस्तुतियां दी जबकि बीएसएफ के 154 जवान 30 मोटरसाइकिलों पर हैरतअंगेज करतब दिखाए।

सैन्य परेड : परेड के दौरान देश के रक्षा विकास एवं अनुसंधशन संगठन द्वारा विकसित 3000 किलोमीटर तक मार करने वाली अग्नि-4 मिसाइल, 150 किलोमीटर तक मार करने वाली ‘प्रहार’ मिसाइल और मानवरहित विमान ‘रूस्तम-1’ को दर्शाया गया। ध्वजारोहण के तुरंत बाद 21 तोपों की सलामी के बीच गजराज की तरह आसमान से मंडराते एमआई 17 हेलीकॉप्टरों ने गुलाब की पंखुरियां बिखेरी तो राजपथ पर बैठे सैकड़ों दर्शक मंत्रमुग्ध हुए बिना नहीं रह सके।

भारतीय सेना टी-72 टैंक, बहुप्रक्षेपण राकेट प्रणाली, पिनाका मल्टी बैरल राकेट प्रणाली और जैमर स्टेशन वीएचएफ (यूएचएफ) का भी प्रदर्शन किया गया। सेना के उन्नत हल्के हेलीकॉप्टर ‘ध्रुव’ ने आकाश में स्वदेशी तकनीकी क्षमता की पताका फहराई। भारतीय वायुसेना ने पहली बार सी-130-जे सुपर हरक्यूलिस विमान का प्रदर्शन किया।

परेड के दौरान परमाणु जैविक रासायनिक शुद्धिकरण प्रणाली के अलावा जैमर स्टेशन का भी प्रदर्शन किया गया। परेड में सेना की 61वीं कैवेलरी, पैराशूट रेजीमेंट, बंगाल इंजीनियर ग्रुप, ब्रिगेड आफ गार्डस, कुमाउं रेजीमेंट, असम रेजीमेंट, महार रेजीमेंट, गोरखा राइफल्स रेजीमेंट और कोर आफ मिल्रिटी पुलिस के जवान शामिल थे।

नौसेना के दस्ते में लेफ्टिनेंट मणिकंदन के. के नेतृत्व में 148 जवानों और वायुसेना के दस्ते में फ्लाइट लेफ्टिनेंट स्नेहा शेखावटे के नेतृत्व में 144 अन्य जवानों ने राष्ट्रपति को सलामी दी। इंस्पेक्टर अनिल कुमार की अगुवाई में 30 बाइक पर सवार 154 जवानों का जाबांज प्रदर्शन।

वायुसेना के सी-130-जे सुपर हरक्यूलिस विमान पहली बार परेड में शामिल हुए। परेड के समापन पर फ्लाईपास्ट का नेतृत्व तीन एमआई-35 हेलीकॉप्टरों ने किया। उनके पीछे एक आईएल-78, दो एएन-32 और दो ड्रोनियर ने आकाश में भारत की शक्ति का प्रदर्शन किया।

इसके बाद, पांच जगुआर और पांच मिग-29 लड़ाकू विमानों ने आकाश के सीने को चीरते हुए गणतंत्र का जयघोष किया। एसयू-30 एमकेआई विमान भी फ्लाईपास्ट का हिस्सा बने।

अर्धसैनिक बलों और अन्य असैन्य बलों मसलन सीमा सुरक्षा बल, असम राइफल्स, तटरक्षक बल, केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस, केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल, सशस्त्र सीमा बल, रेलवे सुरक्षा बल, दिल्ली पुलिस, राष्ट्रीय कैडेट कोर और राष्ट्रीय सेवा योजना के दस्तों ने भी मार्च पास्ट में हिस्सा लिया।

कड़ी सुरक्षा : चाक चौबंद सुरक्षा व्यवस्था के बीच इस बार की परेड का एक महत्वपूर्ण आकर्षण खोजी कुत्ते थे जिन पर दिल्ली पुलिस का बम निरोधक दस्ता और राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड आतंकवादी घटनाओं और अन्य वारदात की जांच में बहुत भरोसा करते हैं। खोजी कुत्तों ने कई तरह की दक्षता का प्रदर्शन किया।

गणतंत्र दिवस समारोह के लिए सुरक्षा के चाक चौबंद प्रबंध किए गए और किसी तरह की अप्रिय घटना से निपटने के लिए अर्ध सैनिक बलों, दिल्ली पुलिस के जवानों के अलावा एनएसजी को तैनात किया गया। ऊंची इमारतों पर अचूक निशानेबाज तैनात थे तो हेलीकॉप्टरों से वायु निगरानी की व्यवस्था करने के साथ क्लोज सर्किट कैमरे लगाए गए। परेड जिस रास्ते से गुजर रही थी उसके आस पास की हर इमारत पर सुरक्षा बल चौकसी बरत रहे थे।

गणतंत्र दिवस समारोह का समापन राष्ट्रगान और आकाश में गुब्बारे छोड़ने के साथ हुआ।

रग-रग में जोश भरता 'जन गण मन'

राष्ट्रगीत हो या राष्ट्रध्वज देशवासियों के आन-बान और शान के साथ प्रेरणा स्रोत होता है। जो राष्ट्रीय सार्वभौमिकता का प्रतीक है। राष्ट्र के सम्मान का राष्ट्रगान "जन गण मन" तमाम हिन्दुस्तानियों की शान और जोश का संचार करने वाला ऐसा ही राष्ट्रगान है जो रग-रग में जोश भरता है।




दुनिया की अव्वल सर्च इंजन वेबसाइट गूगल के मुताबिक संयुक्त राष्ट्र की शैक्षणिक, वैज्ञानिक व कला से जु़ड़ी वैश्विक संस्था यूनेस्को ने दुनिया की अव्वल सर्च इंजन वेबसाइट गूगल के माध्यम से यूनेस्को एंड इंडिया नेशनल एंथम की साइट पर "जन गण मन" को दुनिया का सर्वश्रेष्ठ राष्ट्रगान बताया हैं। आर्थिक-सामाजिक नजरिए से परिपूर्ण इस राष्ट्रगान में सांप्रदायिक सद्भाव झलकता है।

राष्ट्रीयता से ओतप्रोत इस राष्ट्रगीत को बंगाली साहित्यकार और नोबल पुरस्कार से सम्मानित गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर ने दिसंबर 1911 में लिखा जिसे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कोलकाता सालाना अधिवेशन में यानी 27 दिसंबर 1911 को गाया गया। रवींद्रनाथ टैगोर संपादित 'तत्वबोधिनी' पत्रिका में "भारत विधाता" शीर्षक से जनवरी 1912 में पहली दफा यह गीत मशहूर हुआ। खुद रवींद्रनाथ टैगोर ने इसका अंग्रेजी अनुवाद 'दि मॉर्निंग सांग ऑफ इंडिया' शीर्षक से 1919 में किया था और इसके हिन्दी अनुवाद को 24 जनवरी 1950 में राष्ट्रगान का दर्जा प्रदान किया गया।

'जन गण मन' में लबरेज राष्ट्रीयता की पोषक, स्फूर्तिदायक भावना को ध्यान में रखते हुए नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने अपनी आजाद हिंद फौज में 'जय हे' नाम से इस गीत को स्वीकार किया। आजादी की जंग के दौरान 'वंदे मातरम' इस राष्ट्रीय गीत ने हिन्दुस्तानी आजादी की जंग में चैतन्य पैदा कर दिया था।

लेकिन फिर भी कुछ अपरिहार्य कारणों के चलते इसे राष्ट्रगान के बतौर भले ही स्वीकार न किया जा सका, लेकिन भारतीय जनमानस में राष्ट्रगान जितनी ही अहमियत 'वंदे मातरम्‌' को भी हासिल है। 15 अगस्त 1947 को देश आजाद हुआ। उस वक्त हमारे पास अपना राष्ट्रगान नहीं था।

आजाद हिन्दुस्तान संयुक्त राष्ट्र संघ का सदस्य था। जिसके चलते संयुक्त राष्ट्र संघ के कार्यक्रम में भारतीय शिष्टमंडल को भी आमंत्रित किया गया। इस शिष्टमंडल को हिन्दुस्तान के राष्ट्रगान को संयुक्त राष्ट्र संघ कार्यक्रम में पेश करने के लिए कहा गया। लेकिन राष्ट्रगान तो अस्तित्व में ही नहीं था, सो भारत सरकार ने रवींद्रनाथ टैगोर लिखित 'जन गण मन' गीत को कार्यक्रम में पेश करने हेतु स्वीकार किया।

संयुक्त राष्ट्र संघ में यह राष्ट्रगान बेहद कामयाब रहा। जिसे ध्यान में लेते 24 जनवरी 1950 को भारत की संविधान समिति में 'जन गण मन' को भारत के राष्ट्रगान के रूप में स्वीकार किया गया। इस पूरे राष्ट्रगीत में 5 पद हैं। प्रथम पद, जिसे सेनाओं ने स्वीकार किया और जिन्हें साधारणतया समारोहों के मौकों पर गाया जाता है।

आज जब देश महासत्ता बनने की दौ़ड़ में कदम बढ़ाते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कामयाबी की बुलंदियों को छू रहा है, तब इसके विकास की बुनियाद भौतिक विकास, नैतिक तत्वज्ञान और आदर्श के मूलभूत सिद्घांतों और सार्वभौमिकता के मूल्यों पर आधारित होना बेहद जरूरी है। जिन मूल्यों का दिव्यभव्य प्रतीक है देश का राष्ट्रगान 'जन गण मन'।

Saturday, 10 December 2011

न हार मानूंगा, न दिल टूटेगा-अन्ना


गांधीवादी अन्ना हजारे ने शनिवार को कहा कि वे न तो कभी हार मानते हैं और न ही उनका दिल कभी टूटता है।

इस सवाल पर कि सरकार द्वारा लोकपाल विधेयक में उनका पक्ष नहीं लिए जाने को लेकर क्या उनका दिल टूटा है, अन्ना ने कहा कि मेरा दिल कभी टूटेगा नहीं। कभी हारता नहीं हूं। हमेशा प्रयास करता रहता हूं।

केन्द्रीय कानून मंत्री सलमान खुर्शीद के इस कथित बयान की ओर ध्यान दिलाए जाने पर कि वे अन्ना की आत्मा तक पहुंचना चाहते हैं, अन्ना ने कहा कि मेरी आत्मा तक मैं नहीं पहुंच पाया हूं तो सलमान कैसे पहुंचेंगे।

उन्होंने कहा कि जब तक उनके शरीर में प्राण है, वे भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ते रहेंगे और जनता को जागरूक करते रहेंगे।

लोकपाल पर सब राहुल गांधी का करा-धरा रविवार को धरना, 27 से करेंगे अनिश्चितकालीन अनशन


लोकपाल मुद्दे पर सरकार के वायदे से पीछे हटने के पीछे कांग्रेस के युवा नेता राहुल गांधी का हाथ होने का आरोप मढ़ते हुए अन्ना हजारे ने शनिवार को एलान किया कि वे पांच राज्यों के आगामी विधानसभा चुनाव और उसके बाद लोकसभा चुनाव में भी जनता के बीच जाकर इस सरकार को वोट नहीं देने के लिए कहेंगे।

अन्ना ने कहा कि ये सरकार बार-बार पलटी खा रही है और लोकपाल पर अपने वायदे से पीछे हट रही है। प्रधानमंत्री के पत्र को कचरे में डाल दिया। मुझे संदेह है इसके पीछे किसी और का हाथ है। इसके पीछे राहुल गांधी है। उसके अलावा किसी और में दम नहीं है कि ये सब करवा सके। किसकी हिम्मत है कि राहुल की बात न माने। तभी तो गड़बड़ हो रही है।

लोकपाल विधेयक को लेकर रविवार को जंतर-मंतर पर धरना देने जा रहे अन्ना ने सरकार को यह चेतावनी भी दी कि अगर 22 दिसंबर तक संसद विधेयक पारित नहीं करती है तो वह 27 तारीख से अनिश्चितकालीन अनशन शुरू करेंगे।

भ्रष्टाचार से जीना मुश्किल : उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार की वजह से आम लोगों का जीना मुश्किल हो गया है। जब तक श्रेणी-सी और डी के सरकारी कर्मचारियों को लोकपाल के दायरे में नहीं लाया जाएगा, देश के गरीबों को न्याय नहीं मिलेगा। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि राहुल इस देश के युवा नेता हैं। अगर वह समाज की ओर से दिए गए विधेयक को मानें तो राहुल के साथ मिलकर काम करेंगे।

अन्ना ने कहा कि अगर ये सरकार जन लोकपाल नहीं बनाती है तो अगले दो साल तक लगे रहेंगे। जनता के बीच जाकर सरकार के खिलाफ उसे जागरूक करूंगा और फिर आम चुनाव में जनता से इस सरकार को वोट नहीं देने के लिए कहूंगा।

उन्होंने कहा कि संसद की स्थायी समिति ने जो विधेयक संसद को लौटाया है, उसमें लोकपाल से जांच का अधिकार ही छीन लिया है, जबकि सरकार द्वारा तैयार विधेयक में यह अधिकार दिया गया था। यह देश की जनता के साथ धोखाधडी है।

उनके मुताबिक वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा था कि वे संसद में इस विधेयक को लाएंगे। प्रधानमंत्री उन्हें पत्र लिखकर कहते हैं कि नागरिक चार्टर और सभी कर्मचारियों को लोकपाल के दायरे में लाने के बारे में प्रावधान विधेयक में किया जाएगा और अब स्थायी समिति का अध्यक्ष कांग्रेस के अभिषेक मनु सिंघवी बोलते हैं कि अन्ना को ऐसा कोई पत्र दिया ही नहीं था।

सरकार है बनिए की दुकान : अन्ना ने कहा कि यह सरकार है या बनिए की दुकान। यह देश की जनता के साथ धोखाधड़ी है। उन्होंने कहा कि हमने सरकारी मसौदा नामंजूर किया तो संयुक्त समिति बनी, जिसमें सरकार के पांच वरिष्ठ मंत्री थे। ढाई महीने समिति की बैठकें चलीं, लेकिन सरकार ने हमारी बातों को विधेयक के मसौदे में शामिल नहीं किया। कैबिनेट ने जो विधेयक मंजूर किया, वह सरकार का अपना विधेयक था। इस प्रकार स्थायी समिति में हमारे विधेयक पर तो चर्चा हुई ही नहीं।

अन्ना ने कहा कि स्थायी समिति में 30 सदस्य थे, जिनमें से दो अनुपस्थित रहते थे। विधेयक का 17 सदस्यों ने विरोध किया है, जबकि केवल 11 ने समर्थन। यह लोकशाही है या हुकुमशाही। जो 11 लोगों ने कहा, उसे सही माना जा रहा है।

उन्होंने कहा कि हमने 16 अगस्त को आंदोलन किया। जनता की आवाज उठाई। पूरा देश अनशन में शामिल हुआ। मैं सरकार को चेतावनी देता हूं कि अगर 22 दिसंबर तक लोकपाल विधेयक पारित नहीं हुआ तो 27 से अनिश्चितकालीन अनशन शुरू कर दूंगा, जितने दिन संसद नहीं चली है, उतने दिन बढ़ाइए। यह विधेयक पूरे देश का प्रश्न है, जनता का प्रश्न है।

सरकार की मंशा पर सवाल : अन्ना ने कहा कि जन लोकपाल विधेयक नहीं लाने वाली इस सरकार की मंशा भ्रष्टाचार मिटाना नहीं है। सरकार विदेश से कर्ज लेती है और उसे चुकाने के लिए फिर कर्ज लेती है। इस देश में जो भी नया बच्चा जन्म लेता है, 25 हजार रुपए कर्ज की गठरी सिर पर लेकर जन्मता है। यह धन सरकार ने हड़प किया है और भुगतान नन्हे बच्चे को करना पड़ता है।

शहीदों का बलिदान भूली सरकार : उन्होंने कहा कि एक दिन जनता सबक सिखाएगी। यह सरकार देश की भलाई करना चाहती है या खुद की भलाई। यह सरकार शहीदों का बलिदान भूल गई है। भगतसिंह और सुखदेव का बलिदान भूल गई है, लेकिन हम भी चुप नहीं रहेंगे।

कांग्रेस को वोट मत दो : यह पूछने पर कि अगर वह जनता से कांग्रेस को वोट नहीं देने के लिए कहेंगे तो फिर किसे वोट देने को कहेंगे, अन्ना ने कहा कि मैं जनता से कहूंगा कि कांग्रेस को वोट मत दो। चरित्रवान को वोट दो। कांग्रेस पर अविश्वास है।

सड़कों पर उतरो पर हिंसा मत करो : उन्होंने कहा कि मैं युवाओं का आह्वान करता हूं कि सड़कों पर उतरो, लेकिन हिंसा मत करना। जो मिसाल पिछले आंदोलनों में हमने कायम की है, आज पूरी दुनिया उसकी चर्चा कर रही है। हम लडेंगे, लेकिन अहिंसक तरीके से। अन्ना ने बताया कि हमारे 32 मुद्दों को विधेयक में शामिल नहीं किया गया। सरकार अगर बात करेगी, तभी समाधान निकलेगा। रविवार को हमने सभी राजनीतिक दलों को आमंत्रित किया है ताकि खुलकर चर्चा हो जाए।

जेटली, बर्धन, यादव आएंगे : भाजपा से अरुण जेटली, जदयू से शरद यादव, भाकपा से एबी बर्धन, माकपा से वृन्दा कारात, सपा से रामगोपाल यादव, तेदेपा से चंद्रबाबू नायडू आएंगे। कांग्रेस को भी पत्र लिखा था, लेकिन उसने जवाब दिया कि वह किसी को नहीं भेजेगी। फिर भी कांग्रेस को दोबारा पत्र भेजा गया है।

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