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Saturday, 3 December 2011

हीरे पर कनाडा और भारत एक हुए


कनाडा के हीरा निर्यातकों के संगठन ‘डायमंड बोर्स ऑफ कनाडा’ और इंडो-कनाडा चैंबर ऑफ कामर्स (आईसीसीसी) ने हीरा क्षेत्र में द्विपक्षीय व्यापार और निवेश बढ़ाने के लिए सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं।

सहमति पत्र के तहत दोनों संगठन कनाडा और भारत के हीरा विनिर्माताओं के साथ सीधा संबंध स्थापित कर हीरा क्षेत्र में नए अवसरों को बढ़ाने के लिए काम करेंगे।

फिलहाल कनाडा में तराशे गए हीरे को यूरोप निर्यात किया जाता है और फिर इसे दूसरे देशों में भेजा जाता है।

डीबीसी के अध्यक्ष भूषण वोरा और आईसीसीसी अध्यक्ष सतीश ठक्कर ने कनाडा के प्रवासी मामलों के मंत्री जैसन केन्नी और भारतीय महावाणिज्य दूत प्रीति सरन की उपस्थिति में सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए।

इसके अलावा दोनों संगठन संयुक्त रूप से भारतीय हीरा विनिर्माताओं को कनाडा में केंद्र स्थापना करने के लिए प्रोत्साहित करेंगे।

डी-कंपनी का नकली नोटों का खेल


डी-कंपनी पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के साथ मिलकर भारत में नकली नोट का प्रवाह संचालित कर रहे हैं। सरकार का भी मानना है कि ये नोट इतनी उंची क्वालिटी के हैं कि किसी अन्य देश के शासन में बैठे लोगों की मदद के बगैर यह काम नहीं हो सकता।

केन्द्रीय गृह सचिव आरके सिंह ने भी पिछले दिनों कहा ‍कि नकली नोटों की जिस तरह की क्वालिटी देखने में आई है, उससे लगता है कि इसमें किसी देश के शासन के लोग शामिल हैं।

यह पूछने पर कि भारत में बड़े पैमाने पर नकली नोटों के प्रसार में क्या पाकिस्तान का हाथ है, उन्होंने कहा कि हमारा मानना है कि भारत में नकली नोट भिजवाने में किसी देश के शासन के लोग शामिल हैं। कोई शासनेतर व्यक्ति इसके पीछे नहीं है।

ऐसा हो सकता है कि शासन के लोग शासनेतर लोगों को इस काम में लगा रहे हों। इस सवाल पर कि कहीं इसके पीछे पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई का हाथ तो नहीं, सिंह ने कहा ‍कि हम किसी देश के शासन के लोगों का नाम नहीं ले रहे हैं।

आप समझ सकते हैं कि किस देश के शासन के लोग कौन हैं। इस बीच सूत्रों ने बताया कि एनआईए ने नकली नोटों के जरिए आतंकवादी संगठनों को धन मुहैया कराने के छह मामलों का पता लगाया है। आईएसआई अधिक से अधिक मात्रा में नकली नोट भारत में भिजवाने के लिए दिन-रात एक किए हुए है।

सूत्रों ने दावा किया कि एनआईए के पास यह साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य हैं कि नकली नोट के रैकेट में पाकिस्तान का हाथ है। बताया जाता है कि इन नोटों की छपाई पाकिस्तान स्थित किसी सरकारी प्रिंटिंग प्रेस में की जाती है। आम तौर पर पांच-पांच सौ या फिर हजार-हजार रुपए के नोट छापे जाते हैं।

सूत्रों ने बताया कि इस बारे में भी कोई शक नहीं है कि इस जाली मुद्रा का इस्तेमाल बेरोजगार युवकों को आतंकवादी बनने के लिए लुभाने में किया जाता है

...तो जेल में होगा अन्ना का अनशन


अन्ना हजारे ने शनिवार को कहा कि मजबूत लोकपाल की मांग को लेकर इस महीने के अंत में दिल्ली के रामलीला मैदान पर प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन के लिए अगर उन्हें अनुमति नहीं मिलती है तो वे जेल में अनिश्चितकालीन अनशन करेंगे।

हजारे ने कहा कि मैं मैं जेल में अनशन करूंगा। कौन मुझे जेल में अनशन करने से रोक सकता है? कोई भी जेल में मुझे नहीं रोक सकता। उनसे सवाल किया था कि संसद के शीतकालीन सत्र में मजबूत लोकपाल विधेयक पारित नहीं होने की स्थिति में 27 दिसंबर से प्रस्तावित अनशन के लिए अगर पुलिस ने उन्हें अनुमति नहीं दी तो वे क्या करेंगे।

हजारे पक्ष ने रामलीला मैदान पर 27 दिसंबर से पांच जनवरी के बीच अनशन करने के लिए दिल्ली पुलिस से अनुमति मांगी है। हजारे ने कहा कि अगस्त में जब सरकार ने उन्हें राष्ट्रीय राजधानी में विरोध प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी थी तब उन्होंने तिहाड़ जेल में अनशन किया था।

उन्होंने आरोप लगाया कि तय वही था जो उन्होंने (सरकार ने) बाबा रामदेव के साथ किया था। वे मुझे जेल से रिहा होने के बाद हवाई अड्डा ले जाना चाहते थे। दिल्ली हवाई अड्डे पर वायुसेना का एक विमान तैयार था। वे मुझे तब पुणे ले आए होते।

हजारे ने कहा कि सरकार की योजना तब विफल हो गई जब उन्होंने विरोध प्रदर्शन के लिए किसी स्थान की अनुमति मिलने तक जेल से बाहर आने से इनकार कर दिया। इस सवाल पर कि क्या वे सरकार पर दबाव डाल रहे हैं, गांधीवादी कार्यकर्ता ने कहा कि विरोध प्रदर्शन सरकार या कांग्रेस के खिलाफ नहीं है। उन्होंने कहा कि यह राहुल गांधी या प्रधानमंत्री के खिलाफ भी नहीं है।

अन्ना हजारे ने शुक्रवार को कहा था कि लोकपाल के दायरे में ग्रुप-सी के कर्मचारियों को शामिल नहीं करने के संसद की स्थायी समिति के फैसले को पलट देने के लिए हो सकता है कि राहुल गांधी ने हस्तक्षेप किया हो।

देव आनंद : मैं जिंदगी का साथ निभाता चला गया



देव आनंद का जन्म 26 सितंबर 1923 को पंजाब के गुरदास कस्बे में हुआ था। उनके पिता पिशोरीमल नामी वकील होने के साथ कांग्रेस कार्यकर्ता थे और स्वतंत्रता आंदोलन में जेल भी गए थे। वे काफी अध्ययनशील थे और कई भाषाएँ जानते थे। उन्हें हिन्दी/अँग्रेजी/संस्कृत/उर्दू/पंजाबी/ /अरबी/जर्मन/हिब्रू जैसी भाषाएँ आती थीं। किताबें पढ़-पढ़ कर उन्होंने इन भाषाओं को सीखा था। गीता और कुरान पर उनका अच्छा अधिकार था और बाइबिल के बारे में तो वे सदा कहा करते थे कि अगर अँगरेजी भाषा सीखनी हो, तो बाइबिल पढ़ो।

देव आनंद अपने माता-पिता की पाँचवीं संतान थे। वे कुल नौ भाई-बहन थे। चार भाई और पाँच बहनें। देव तीसरे पुत्र थे। दो बड़े भाई थे, मनमोहन और चेतन आनंद और छोटा भाई विजय आनंद। देव आनंद को जानने वाले चेतन और विजय आनंद को जानते हैं, जिन्होंने देव आनंद की फिल्म निर्माण संस्था नवकेतन के माध्यम से फिल्मी दुनिया में अपना अलग मुकाम बनाया। मनमोहन और चेतन आनंद का निधन हो चुका है। 1940 में देव आनंद की माता का निधन हो गया था, इसलिए इन भाई-बहनों को आपस में एक-दूसरे की देखभाल की जवाबदारी पूरी करनी पड़ी।

फिल्म इंडिया और अशोक कुमार
बचपन के वे दिन कठिनाइयों भरे थे, फिर भी देव आनंद दोस्तों के साथ आवारागर्दी करने और कभी-कभार फिल्में देखने का मौका जुगाड़ लेते थे। उन्हीं दिनों उन्हें बाबूराव पटेल की पत्रिका 'फिल्म इंडिया' पढ़ने का चस्का लग गया। वे रद्दी की दुकान से इस पत्रिका के पुराने अंक खरीद लाते और बड़े चाव से पढ़ते। अच्छे-अच्छे अभिनेताओं को उनकी क्षमता से रूबरू कराने का पटेल का अंदाज, यानी लेखन शैली देव आनंद को बहुत भाती थी। पुरानी पत्रिकाओं के ग्राहक देव आनंद के प्रति दुकानदार को भी लगाव हो गया, जो पत्रिकाएँ छाँटकर अलग रख लेता और कभी-कभी मुफ्त में दे देता। इसी दुकान पर एक दिन देव आनंद ने सुना कि अपनी फिल्म 'बंधन' (1940) के प्रीमियर के लिए अशोक कुमार गुरदासपुर आने वाले हैं। वे आए, भीड़ ने उमड़कर अपनी खुशी को प्रकट किया। कुछ लोगों ने ऑटोग्राफ भी लिए, लेकिन देव आनंद दूर खड़े देखते रहे, श्रद्धा से अभिभूत।

प्रशंसकों की भीड़ में भी अशोक कुमार को निर्विकार भाव से शांतिपूर्वक सबसे मिलते देख देव को आश्चर्य हुआ। वह उसके जीवन का एक विशेष क्षण था, जब उसके दिमाग में यह विचार आया-अगर आगे की पढ़ाई के लिए विदेश नहीं जा सका तो फिल्म स्टार बन जाऊँगा। उस समय वह लाहौर कॉलेज से अँगरेजी साहित्य में बीए ऑनर्स कर रहा था और अँगरेजी में एम.ए करने की इच्छा भी रखता था।

किस्मत से बनी किस्मत
बच्चों की शिक्षा के मामले में पिशोरीमल जागरूक अवश्य थे। उन्होंने चेतन आनंद को लाहौर कॉलेज से एम.ए.कराया और आईसीएस की परीक्षा देने लंदन भेजा था, लेकिन जब देव आनंद के एम. ए. करने का समय आया, तब वे आर्थिक तंगी के दौर से गुजर रहे थे, उन्होंने देव आनंद को किसी बैंक में नौकरी करने की सलाह दी। देव आनंद महत्वाकांक्षी थे। वे कुछ बनना चाहते थे। नाम कमाना चाहते थे। उन्होंने कहा कि वे बंबई जाकर फिल्मों में भाग्य आजमाना चाहेंगे।

पिता ने स्पष्ट कर दिया कि बंबई का खर्च उठाने की उनकी ताकत नहीं है। देव आनंद ने खुद के बलबूते पर बंबई में स्थापित होने का संकल्प लिया। बड़े भाई चेतन के साथ फ्रंटियर मेल से मुंबई आए। तब उनकी जेब में सिर्फ 30-35 रुपए थे। चेतन ने देव को अपने लेखक मित्र राजा राव के साथ रख दिया। यह जुलाई 1943 की बात है। उस समय देश भर के सिनेमा घरों में बॉम्बे टॉकीज की युगांतकारी फिल्म 'किस्मत' चल रही थी, जिसमें अशोक कुमार ने एंटी हीरो की भूमिका निभाई थी। यह एक अपराध कथा थी। और संयोग देखिए कि देव ने अपने आगामी फिल्मी जीवन में अपराध कथाओं की लीक पर चलना ही ज्यादा पसंद किया।

चेतन आनंद देहरादून के एक स्कूल में अँगरेजी साहित्य का अध्यापन करने लगे थे। देव के मुंबई आने का तात्कालिक कारण नौसेना की नौकरी प्राप्त करना भी था, जिसके लिए वे चुन लिए गए और छह महीने नौसेना में काम भी किया, लेकिन उनके पिता की राजनीतिक पृष्ठभूमि के कारण नौकरी पक्की नहीं हुई। बाद में देव ने डाक विभाग में कारकूनी कर ली। तनख्वाह थी 165 रुपए महीना। इतना रुपया उस जमाने में काफी होता था। मुंबई में जमे रह कर फिल्मों में हाथ-पैर मारने के लिए अच्छा सहारा था।

छुट्टिसयों में चेतन आनंद भी मुंबई आ जाते। उनका झुकाव वामपंथ की तरफ था और साहित्यिक-सांस्कृतिक जगत में उनकी अच्छी पैठ थी। देव आनंद उनके साथ इप्टा (इंडियन पीपुल्स थियेटर एसोसिएशन) की गतिविधियों में भाग लेने लगे। यहीं ख्वाजा अहमद अब्बास और बलराज साहनी निर्देशित 'जुबैदा' में नायक के छोटे भाई का रोल दिया गया। इस मामूली भूमिका ने उनके लिए फिल्मों के द्वार खोल दिए। इसी नाटक के दौरान प्रभात फिल्म कंपनी (पुणे) संचालक बाबूराव पै की नजर देव आनंद पर पड़ी।

कॉफी के प्याले में तैरते सपने
उन दिनों बांद्रा में 'टॉक ऑफ द टाउन' नामक होटल 'पेरिसियन डैरी' के नाम से जाना जाता था। जहाँ फिल्मों में काम पाने के इच्छुक स्ट्रगलरों का जमावड़ा हुआ करता था। जहाँ कभी-कभार दिलीप कुमार और राज कपूर जैसे स्थापित कलाकार भी आया करते थे, जिससे होटल के कारिंदे हड़बड़ा जाते थे और कोहराम मच जाता था। उस जगह कॉफी की चुस्कियाँ लेते हुए भविष्य के सपने देखना जुझारू कलाकारों का खास शगल हुआ करता था। ऐसे ही एक दिन उस रेस्तराँ में देव आनंद ने सुना कि निर्माता प्यारेलाल संतोषी (फिल्मकार राकुमार संतोषी के पिता) को अपनी फिल्म 'हम एक हैं' के लिए नायक की जरूरत है। अगले ही‍ दिन देव आनंद संतोषी के दफ्तर पहुँचकर उनके आने की प्रतीक्षा में जा बैठे। संतोषी आए, देव आनंद ने अपना मकसद बताया। सभी स्ट्रगलों को दिया जाने वाला स्टॉक उत्तर मिला- कुछ सोचना पड़ेगा।

ऐसा कीजिए आप मुझसे टेलीफोन पर संपर्क कीजिए। जो भी उत्तर होगा, मैं बता दूँगा। देव आनंद ने इस टालू जवाब को गंभीरता से नहीं लिया। एक माह बाद संतोषी के दफ्तर से पत्र आया कि स्क्रीन टेस्ट के लिए पूना पहुँचिए। देव आनंद वहाँ गए और 55 अन्य युवकों के साथ स्क्रीन टेस्ट में चुन लिए गए। वेतन तय हुआ 400 रुपए माहवार।

प्रणय दृश्य की परेशानी
इसे देव आनंद का भाग्य ही कहा जाएगा कि प्रभात फिल्म कंपनी ने 'हम एक हैं' फिल्म के लिए उदयकुमार नामक जिस नवोदित अभिनेता का चयन किया था, वह उसी फिल्म की एक नई अभिनेत्री के प्रेमजाल में फँस गया। उनका प्रेम तीसरी अवस्था (थर्ड स्टेज) में जा पहुँचा था। और स्टूडियो के कामकाज में अड़चनें आने लगी थीं। प्रभात के कर्ताधर्ताओं ने उन्हें नारियल थमा कर बाहर कर दिया। नए नायक का प्रश्न उठा, तो देव आनंद को चुन लिया। इस फिल्म की नायिका कमला कोटनीस थीं, जो पहले भी कुछ फिल्मों अभिनय कर चुकी थीं। देव आनंद एकदम नए और सिर्फ 22 साल के थे।

आसपास सारा वातावरण मराठी था और पहले ही दिन देव को कमला के साथ प्रणय दृश्य फिल्माने के लिए कहा गया। कमला कोटनीस के सहयोगी रुख के कारण देव आनंद ने जैसे-जैसे यह फिल्म पूरी की। इसके बाद प्रभात की 'आगे बढ़ो' फिल्म में देव आनंद को गायिका अभिनेत्री खुर्शीद के साथ नायक बनाया गया। उस बुजुर्ग अभिनेत्री के साथ प्रणय दृश्य करने में देव आनंद को कठिनाई हुई। भारत-पाक विभाजन के कारण देव आनंद की ये दोनों फिल्में बॉक्स ऑफिस पर पिटकर आई-गई हो गई।

धोबी की दिलचस्प गलती
प्रभात स्टूडियो के शुरुआती दिनों में देव आनंद को अपने धोबी की गलती से एक ऐसे व्यक्ति की मित्रता नसीब हुई, जो आगे चलकर 'प्यासा' 'कागज के फूल' और 'साहब बीवी और गुलाम' जैसी कालजयी फिल्मों का निर्देशक बना। वह थे गुरुदत्त। गुरुदत्त भी अलमोड़ा में उदयशंकर की नृत्य मंडली से प्रशिक्षित होकर फिल्मों में काम ढूँढने आए थे। इन दिनों प्रभात में सहायक निर्देशक का काम देख रहे थे।

धोबी ने इनके कुर्तों की अदलाबदली कर दी थी, देव आनंद ने स्टूडियो में गुरुदत्त को अपना शर्ट पहने देखा तो कहे बगैर नहीं रह पाए कि हममें से जो भी पहले कामयाब रहेगा, वह दूसरे को अपनी फिल्म में 'ब्रेक' देगा। 1951 और 52 में देव आनंद ने ‍अपनी फिल्म निर्माण संस्था नवकेतन के बैनर तले बनी फिल्म 'बाजी' और 'जाल' का निर्देशन गुरुदत्त से कराया। इसी प्रकार 1955 में गुरुदत्त ने अपनी फिल्म 'सीआईडी' में देव आनंद को शकीला और वहीदा रहमान के नायक के रूप में लिया था। (स‍ीआईडी गुरुदत्त प्रॉडक्शंस की पहली फिल्म थी)

बेकार देव आनंद को काम दो
प्रभात की दूसरी फिल्म 'आगे बढ़ो' (1947) का निर्माण पूरा होते न होते प्रभात के संचालक मंडल में मतभेद हो गए। बाबूराव पै ने प्रभात छोड़कर मुंबई के फेमस स्टूडियो से संबंध जोड़ लिए। फेमस ने मोहन नामक फिल्म का निर्माण शुरू किया, जिसकी नायिका के रूप में हेमावती को चुना गया। वह बाद में अभिनेता सप्रू की पत्नी बनी। यह फिल्म कभी प्रदर्शित नहीं हुई। प्रभात का तीन साल का करार भी खत्म हो गया और पोस्ट ऑफिस की नौकरी वे पहले ही छोड़ चुके थे। देव आनंद बेकारी की स्थिति में आ गए थे और गुरदासपुर लौटने का विचार चल ही रहा था कि दादामुनि (अशोक कुमार) के सौजन्य से उन्हें बॉम्बे टॉकीज की फिल्म 'जिद्दी' (1948) में काम मिल गया।

इस फिल्म के लिए उन्हें बीस हजार रुपयों में अनुबंधित किया गया था। देव आनंद के लिए यह अच्छी शुरुआत थी। असल में इस फिल्म के निर्देशक शाहिद लतीफ और पटकथा लेखिका इस्मत चुगताई इस फिल्म में काम करने के लिए अशोक कुमार पर जोर डाल रहे थे। उन दिनों अशोक कुमार बॉम्बे टॉकीज के सर्वेसर्वा थे और बहुत व्यस्त थे। एक दिन झल्लाकर उन्होंने शाहिद और इस्मत (दोनों पति-पत्नी) से झल्लाकर कह दिया कि पीछे क्यों पड़े हो। वो देव आनंद बेकार घूम रहा है, उसे काम दो।

'जिद्दी' में देव आनंद की नायिका कामिनी कौशल थीं। इसका संगीत खेमचंद प्रकाश ने दिया था, जिन्होंने बाद में बॉम्बे टॉकीज की फिल्म 'महल' में लता मंगेशकर से 'आएगा आने वाला' जैसा शाश्वत गीत गवाया था। जिद्दी में किशोर कुमार ने पहली बार पार्श्वगायन किया, वह भी देव आनंद के लिए। यहीं से किशोर और देव आनंद के बीच अभिन्न मित्रता की शुरुआत हुई। आगे चलकर देव ने अपने अधिकांश गाने किशोर से ही गवाए। 1987 में किशोर कुमार के असामयिक निधन तक यह दोस्ती कायम रही।

अंतिम बार किशोर ने 'सच्चे का बोलबाला' (1989) फिल्म के लिए देव आनंद को अपनी आवाज दी थी। 'जिद्दी' की सफलता ने देव आनंद को स्टार का दर्जा दिला दिया। उस समय तक दिलीप कुमार और राज कपूर भी स्टार का दर्जा हासिल कर चुके थे। दोनों की आठ-दस फिल्में प्रदर्शित हो चुकी थीं। अशोक कुमार के बाद इन नवोदित अभिनेताओं के मासूम चेहरे देखकर सिने दर्शक अभिभूत थे, क्योंकि आजादी के बाद सचमुच नई शुरुआत हो गई थी।

अगले तीन दशकों तक इस त्रिमूर्ति की दोस्ताना प्रतिस्पर्धा को हिन्दी सिनेमा के दर्शकों ने बड़े चाव से देखा और इनकी फिल्मों का स्वाद चखा। तीनों की अभिनय शैलियाँ एक-दूसरे से भिन्न थीं और तीनों के वफादार दर्शकों का समूह भी अलग-अलग रहा। आज तक इन तीनों के नाम एक साथ लिए जाते हैं।

Saturday, 26 November 2011

26/11, पाक ने मांगे भरोसेमंद सबूत



पाकिस्तान ने भारत से वर्ष 2008 के मुंबई हमले के आरोपियों के खिलाफ ‘भरोसेमंद सबूत’ पेश करने को कहा है कि ताकि ये लोग अदालत से अपनी रिहाई हासिल नहीं कर सकें।

गृहमंत्री रहमान ने कहा कि पाकिस्तान ने भारत द्वारा उपलब्ध कराए गए सबूतों के आधार पर जमात उद दवा के प्रमुख हाफिज मोहम्मद सईद और मुंबई हमले के अन्य आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की, लेकिन संदिग्ध छूट गए क्योंकि भारत द्वारा दी गई सूचना अस्पष्ट और नाकाफी थी।

मलिक ने एक कार्यक्रम के अवसर पर कहा कि पाकिस्तान भारत द्वारा प्रदान की गई सूचना के आधार पर कार्रवाई करने को तैयार है और ये सूचनाएं अदालत में भी जरूरी हैं। हाफिज सईद की गतिविधियों के बारे में एक सवाल के जवाब में गृहमंत्री ने कहा कि जेयूडी प्रमुख को अदालत ने रिहा किया है।

मलिक ने कहा कि पाकिस्तान में लोकतंत्र है ओर अदालत स्वतंत्र रूप से निर्णय करने को मुक्त हैं। मुंबई हमले के बाद सईद को नजरबंद कर दिया गया, लेकिन छह माह बाद लाहौर उच्च न्यायालय के आदेश पर उसे रिहा कर दिया गया।

पाकिस्तान प्रशासन ने मुम्बई हमले की साजिश रचने और उसके लिए धन की व्यवस्था करने के आरोप में लश्कर-ए-तैयबा कमांडर जकीउर रहमान समेत सात आरोपियों को गिरफ्तार किया था लेकिन विभिन्न कारणों से उनकी सुनवाई में आतंकवाद निरोधक अदालत में रुक गई।

विदेशमंत्री रंजन मथई ने हाल ही में मलिक के इस दावे का खंडन किया कि भारत ने मुंबई हमले के आरोपियों के मामले में अपर्याप्त सबूत दिए। भारत सईद को मुंबई हमले का मुख्य साजिशकर्ता बताता है।

उल्लेखनीय है कि 26 नवंबर को हुए इस आतंकवादी हमले में करीब 170 लोगों की मौत हो गई थी और कई अन्य घायल हो गए थे। हमले में मारे गए लोगों में कई विदेशी नागरिक भी थे।

अंतिम गेंद पर मुंबई टेस्ट ड्रॉ

भारत को वेस्टइंडीज के बीच मुंबई टेस्ट में आज रोमांच की सारी हदें पार हो गईं और यह मैच अंतिम गेंद पर ड्रॉ हुआ। आज खेल के अंतिम दिन दो सत्र के खेल में भार‍त को जीत के लिए 243 रन बनाने थे, लेकिन वह नौ विकेट पर 242 रन ही बना सका। आर अश्विन को मैन ऑफ द मैच और मैन ऑफ द सिरीज चुना गया।

भारत ने सिरीज के पहले दो टेस्ट जीतकर सिरीज पहले ही अपने नाम कर ली थी। इस मैच के ड्रॉ होने के बाद भारत ने यह सिरीज 2-0 से जीत ली।

आज खेल के पांचवें दिन पहले सत्र के खेल में ही वेस्टइंडीज की पूरी टीम 134 रनों पर ढेर हो गई। वेस्टइंडीज को पहली पारी में 108 रनों की महत्वपूर्ण बढ़त मिली थी, लिहाजा, भारत को यह मैच जीतने के लिए दो सत्र के खेल में (लगभग 64 ओवर) 243 रनों का लक्ष्य मिला।

भारतीय पारी की शुरुआत अच्छी नहीं रही और गौतम गंभीर 12 रन बनाकर पैवेलियन लौट गए। वीरेंद्र सहवाग ने हालांकि 60 रनों की पारी खेली, लेकिन इस बीच उन्हें तीन जीवनदान मिले। राहुल द्रविड़ ने 33 रन बनाए और वे मिस टाइम स्ट्रोक पर सैम्यूल्स को विकेट दे बैठे।

इसके बाद सचिन तेंडुलकर (3) भी सैम्यूल्स का शिकार होकर सस्ते में आउट हो गए। वीवएस लक्ष्मण से उम्मीद थी कि वे भारत को जीत दिलाकर ही दम लेंगे, लेकिन रविराम पाल की शॉर्ट गेंद को पुल करने के प्रयास में वे कैच आउट हुए। उन्होंने 31 रन बनाए।

चायकाल के बाद भारत को 30 ओवर में 95 रनों की जरूरत थी और उसके छह बल्लेबाज शेष थे, लेकिन लक्ष्मण के बाद कप्तान महेंद्र सिंह धोनी (13) के आउट होते ही भारती पारी पर सकंट आ गया।

विराट कोहली और आर अश्विन के विकेट पर होते हुए भारत की जीत मुमकिन लग रही थी, लेकिन कोहली (63) के आउट होते ही मैच बेहद रोमांचक हो गया और अंतिम गेंद में अश्विन जीत के लिए आवश्यक दो रन नहीं बना पाए।

आज वेस्टइंडीज ने अपने कल के स्कोर 81/2 के स्कोर से आगे खेलना शुरू किया। उसके आठ विकेट केवल 55 रन जोड़कर पैवेलियन लौट गए। वेस्टइंडीज की इस बुरी हालत के लिए भारतीय स्पिनर जिम्मेदार रहे। प्रज्ञान ओझा ने छह विकेट लिए, जबकि आर अश्विन ने चार विकेट लिए।

वेस्टइंडीज ने अपना पहली पारी में 590 रन बनाए थे, जबकि भारत की पहली पारी 482 रनों पर खत्म हुई थी। अंतिम स्कोर इस प्रकार रहा- वेस्टइंडीज 590 और 134 रन, भारत 482 और 242/9

26/11 हमले में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि



मुंबई में 26 नवंबर 2008 को हुए आतंकवादी हमले की तीसरी बरसी पर इसमें मारे गए और आतंकवादियों का मुकाबला करते हुए शहीद हुए सुरक्षा बल के जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस बीच भारत ने मुंबई आतंकवादी हमले के साजिशकर्ताओं के खिलाफ सबूत पेश किए जाने के बावजूद पाकिस्तान की ओर से ‘कड़ी’ कार्रवाई नहीं करने पर दुख जताया।

इस मौके पर भावनाएं अनियंत्रित रूप से नहीं फूटी, न ही सड़कों पर शहीदों की तस्वीरों के साथ कोई जूलूस ही निकाला गया और न ही आतंकवाद निरोधक बल की ओर से कोई परेड ही किया गया।

महाराष्ट्र के राज्यपाल के शंकरनारायणन, राज्य के मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण और कई अन्य नेताओं ने मुंबई आतंकवादी हमले में शहीद उन जवानों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की, जिन्होंने 10 पाकिस्तानी आतंकवादियों से लोगों की बहादुरी से रक्षा करते हुए अपने प्राण न्योछावर कर दिए थे।

राज्यपाल ने पुष्पचक्र अर्पित किया : राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने 26 नवंबर 2008 को हुए आतंकवादी हमले में पाकिस्तानी आतंकवादियों से मुकाबला करते हुए शहीद हुए आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) के प्रमुख हेमंत करकरे सहित सुरक्षा बलों के 18 जवानों की याद में सुबह यहां पुलिस स्मृतिस्थल पर पुष्पचक्र अर्पित करके कुछ समय के लिए मौन रखा।

इस मौके पर करकरे की पत्नी कविता, अपने सीने पर गोली खाकर भी आतंकवादी अजमल कसाब को भागने का मौका नहीं देने वाले पुलिसकर्मी तुकाराम ओंबले की पुत्री वैशाली ओंबले और करकरे के साथ शहीद हुए मुठभेड़ विशेषज्ञ विजय सालस्कर की पत्नी स्मिता सालस्कर भी उपस्थित थीं।

धोनी और सचिन ने पुष्पांजलि अर्पित की : आतंकवादी हमले के दौरान भारी तबाही झेलने वाले ताजमहल होटल और टॉवरों के पास मारे गए लोगों की स्मृति में किसी भी आधिकारिक कार्यक्रम का आयोजन नहीं किया गया था। इसके बावजूद भारतीय क्रिकेट कप्तान महेंद्रसिंह धोनी और मास्टर ब्लास्टर सचित तेंडुलकर ने मारे गए लोगों की याद में होटल में स्थित स्मृतिस्थल पर पुष्पांजलि अर्पित की।

ताज के प्रवक्ता ने पीटीआई से कहा कि यहां पर सब कुछ आम दिनों की तरह ही सामान्य ढंग से चल रहा है। इस मौके पर ओबेराय और ट्राइडेंट होटलों और मैरीन ड्राइव में मारे गए लोगों की याद में मोमबत्तियां जलाई गईं। दोनों होटलों पर हुए हमले में 35 लोग मारे गए थे। छत्रपति शिवाजी टर्मिनस पर एक रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। यहां पर हुए हमले में 52 बेगुनाह लोग मारे गए थे।

Tuesday, 22 November 2011

नहीं थमेगी रुपए की गिरावट : प्रणब

रुपए के अब तक अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंचने के बीच वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा है कि भारतीय रिजर्व बैंक के हस्तक्षेप से इस गिरावट पर अंकुश नहीं लगेगा।

वित्त मंत्री ने आज यहां संवाददाताओं से कहा कि विदेशी संस्थागत निवेशकों की निकासी तथा वैश्विक कारण रुपए में गिरावट के पीछे हैं और रिजर्व बैंक के हस्तक्षेप से इस मामले में किसी तरह की मदद मिलने वाली नहीं है।

मुखर्जी ने कहा कि भारतीय मुद्रा के मूल्य में इसलिए गिरावट आ रही है क्योंकि एफआईआई घरेलू शेयर बाजार से निकासी कर रहे हैं और वैश्विक अनिश्चितता की वजह से यह उतार-चढ़ाव और बढ़ रहा है। रुपए में पिछले कुछ समय से लगातार कमजोरी का रुख बना हुआ है। अंतर बैंक विदेशी विनिमय बाजार में रुपया आज शुरुआती कारोबार में गिरकर अपने सबसे निचले स्तर 52.73 प्रति डालर पर आ गया।

अन्य मुद्राओं की तुलना में डॉलर की मजबूती से भी रुपए की धारणा प्रभावित हुई।

लश्कर की मदद कर रही है आईएसआई

गृह राज्य मंत्री जितेन्द्रसिंह ने मंगलवार को संसद में दोहराया कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई आतंकवादी संगठनों की मदद कर रही है।

गृह राज्य मंत्री जितेन्द्रसिंह ने कहा कि खुफिया जानकारी के मुताबिक पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन विशेषकर लश्कर-ए-तोबा, जैश-ए-मुहम्मद, हिजबुल मुजाहिदीन आदि आईएसआई से सहायता प्राप्त कर रहे हैं।

उन्होंने लोकसभा को बताया कि सरकार आतंकवाद, अतिवाद और अलगाववाद के सभी रूपों में अभिव्यक्तियों का मुकाबला करने के लिए प्रतिबद्ध है।

सिंह ने किरीट प्रेमजीभाई सोलंकी के सवाल के लिखित जवाब में कहा कि आतंकवाद से निपटने के लिए तमाम उपायों के अलावा सरकार विभिन्न मंचों पर सीमा पार आतंकवाद से जुड़े पहलुओं और मुद्दों को उठाती है।

पहला दिन इंडीज के बल्लेबाजों के नाम

भारत और वेस्टइंडीज के बीच यहां सिरीज के तीसरे और अंतिम टेस्ट मैच के पहले दिन वेस्टइंडीज के बल्लेबाजों ने दमदार प्रदर्शन करके भारतीय गेंदबाजों को विकेट के लिए तरसा दिया।


टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी वेस्टइंडीज के शीर्ष क्रम के चारों बल्लेबाजों ने अर्धशतक लगाए। पहले दिन का खेल खत्म होने तक वेस्टइंडीज ने दो विकेट के नुकसान पर 267 रन बना लिए थे। क्रिक एडवर्ड्‍स 65 और डेरैन ब्रावो 57 रन बनाकर खेल रहे थे।

वेस्टइंडीज के लिए एड्रियन बराथ और क्रेग ब्रेथवेट ने पहले विकेट के लिए 137 रनों की साझेदारी निभाई। बराथ (62) और ब्रेथवेट (68) आर अश्विन की गेंद पर आउट हुए। 150 रनों के स्कोर तक वेस्टइंडीज के दोनों सलामी बल्लेबाज पैवेलियन लौट चुके थे। इसके बाद क्रिक एडवर्ड्‍स और डेरैन ब्रावो ने दिन का खेल खत्म होने तक इंडीज का और कोई विकेट नहीं गिरने दिया।

भारतीय गेंदबाजों ने विकेट लेने के लिए हर संभव प्रयास किए, लेकिन कभी वेस्टइंडीज के बल्लेबाजों की तकनीक ने उन्हें सफल नहीं होने दिया और यदि बल्लेबाजों ने गलती भी की तो भारतीय खिलाड़ी उनका कैच नहीं पकड़ सके। अश्विन सबसे कामयाब गेंदबाज रहे, प्रज्ञान ओझा को कड़ी मेहनत के बावजूद भी किस्मत का साथ नहीं मिला और वे विकेट न ले सके।

इस मैच के लिए भारत ने अपनी टीम में दो बदलाव किए। युवरराज सिंह और उमेश यादव के स्थान पर विराट कोहली और वरुण आरोन को अंतिम ग्यारह में शामिल किया गया। वहीं वेस्टइंडीज की टीम से शिवनारायण चंद्रपाल मिसफिट होने की वजह से बाहर रहे। उनके स्थान पर किरोन पॉवेल को टीम में जगह दी गई।

भगत सिंह की यादों को ताजा करेगी ‘इंकलाब’

भगत सिंह

गांधीवादी अन्ना हजारे के आंदोलन से काफी पहले नागरिकों की सक्रियता पर बनी फिल्म ‘इंकलाब’ को जल्द ही पणजी में आयोजित होने जा रहे भारत के अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव के लघु फिल्म खंड में दिखाया जाएगा।

चंडीगढ़ स्थित फिल्मकार गौरव छाबड़ा ने बताया कि यह फिल्म एक कार्यकर्ता के रूप में उनके निजी अनुभव पर आधारित है। यह फिल्म ऐसे सामाजिक और राजनीतिक परिदृश्य और समय में बनाई गई है जब भारत में भ्रष्टाचार के खिलाफ संघर्ष चल रहा है और इसे लेकर देश भर में एक खासा जन आंदोलन खड़ा हो गया है।

छाबड़ा ने बताया कि ‘इंकलाब’ एक लघु फिल्म है जो संसद में बम फोड़ कर भगत सिंह द्वारा जताए गए विरोध की घटना से प्रभावित है।

छाबड़ा ने कहा, ‘जैसी कि योजना थी, बम ने किसी को नुकसान नहीं पहुंचाया लेकिन महात्मा गांधी के दौर और बेहद लोकप्रिय अहिंसक स्वतंत्रता संग्राम के दौरान इस तरह के काम को तुरंत ‘हिंसात्मक’ करार दे दिया गया। इस फिल्म में नागरिक आंदोलन के विकेंद्रीकरण की बात की गई है और यह किसी भी क्षेत्र में शक्ति के केंद्रीकरण का समर्थन नहीं करती है।

दिल्ली में हैं यूपी के भिखारी-राहुल

कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी ने कहा कि जब मैं दिल्ली की सड़को पर भीख मांगते हुए लोगों को देखता हूं तो अपनी कार का शीशा उतारकर उनसे पूछता हूं कि किस राज्य के रहने वाले हैं तो जवाब मिलता है कि वे उत्तरप्रदेश के निवासी हैं।

राहुल ने आगामी विधानसभा चुनाव के लिए अपनी मुहिम के तहत यहां आयोजित जनसभा में कहा कि जब वे उत्तरप्रदेश के लोगों के दूसरे राज्यों में जाकर भीख मांगने की बात कहते हैं तो उसका हर तरफ विरोध होता है, लेकिन यह एक कड़वी सच्चाई है।

भीख मांगने संबंधी अपने पिछले बयान पर सफाई देते हुए राहुल गांधी ने कहा कि राजनेताओं को अपनी कार के शीशे उतारकर सच्चाई को देखना चाहिए। नेता उन भिखारियों से पूछें तो पता लगेगा कि उत्तरप्रदेश की क्या हालत है और यहां क्या हो रहा है।

गौरतलब है कि राहुल ने पिछले दिनों इलाहाबाद के फूलपुर में आयोजित जनसभा में कहा था कि उत्तरप्रदेश के लोग दिल्ली और पंजाब समेत दूसरे राज्यों में जाकर आखिर कब तक भीख मांगेगे। राहुल के इस बयान की खासी आलोचना हुई थी।

ब्लॉगिंग की दुनिया में अन्ना हजारे की वापसी

पूर्व ब्लॉगर के साथ विवाद के बाद अपना ब्लॉग बंद करने वाले गांधीवादी अन्ना हजारे ने मंगलवार को अपने नए ब्लॉग में गांवों के सर्वांगीण विकास का सपना बुनते हुए इसमें ‘सद्चरित्र’ उद्योगपतियों को शामिल करने की जरूरत बताई।

पिछले ब्लॉग में अन्ना हजारे जहां क्रांति को लंबे समय तक जिंदा रखने का आह्वान करते हैं वहीं नए ब्लॉग में उन्होंने जनलोकपाल और खुद के लिए समर्थन मांगा है। नए ब्लॉग को उनके संगठन ‘इंडिया अंगेस्ट करप्शन’ के पते के साथ जोड़ा गया है। इसके अलावा ब्लॉग अंग्रेजी और हिंदी में है। पहले उनके ब्लॉग मराठी और अंग्रेजी में आते रहे हैं।

अन्ना हजारे ने अपने ब्लॉग में जनलोकपाल, चुनाव सुधार और शक्तियों के विक्रेंद्रीकरण के अलावा भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिये आदर्श गांवों के विकास का ताजा एजेंडा पेश किया।

हजारे ने देश के ग्रामीण विकास के लिए अपने गांव रालेगण सिद्धि का उदाहरण दिया और इस काम में ‘सद्चरित्र’ उद्योगपतियों को शामिल करने की जरूरत पर बल दिया जो देश की सेवा करने के लिए इच्छुक हों जैसे महात्मा गांधी के स्वतंत्रता आंदोलन में कुछ ने मदद की थी।

गांधीवादी हजारे ने अपने ब्लॉगर राजू पारूलेकर के साथ विवाद के बाद इस महीने के पहले सप्ताह में अपना ब्लॉग बंद कर दिया था। उन्होंने आज नए पते के साथ नया ब्लॉग लिखा। पेशे से पत्रकार पारूलेकर हजारे के ब्लॉग का प्रबंधन करते थे।

हजारे ने आरोप लगाया था कि पारूलेकर ने बिना उनसे बात किए टीम अन्ना की कोर कमेटी के पुर्नगठन पर उनका विचार जारी कर दिया था। हालांकि पारूलेकर ने इस आरोप का खंडन किया और हजारे का अप्रकाशित पत्र सार्वजनिक कर दिया, जिसमें उन्होंने टीम को पुर्नगठित करने की बात कही थी।

अपने ताजा ब्लॉग में हजारे ने बड़े उद्योगों का समर्थन करने वाले नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि हमारे देश के कई नेताओं को लगा कि बड़े बड़े उद्योग खड़े किए बिना देश का विकास नहीं होगा और हमारे नेता बड़े-बड़े उद्योग खड़े करने में लग गए। जैसे-जैसे शहरों में उद्योग खड़े होते गए वैसे-वैसे गांव के लोग शहर की तरफ बढ़ते गए। शहर फैलते गए और झोपड़ियां बढ़ती गई, अपराध बढ़ गए और प्रकृति एवं मानवता का शोषण शुरू हुआ।

उन्होंने बड़े उद्योगों को बढ़ावा देने वाली नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि देश के विकास का सपना देखते हुए बड़े पैमाने पर उद्योग खड़ा कर दिया गया। उद्योग खड़ा करने के बाद 65 साल में देश का सही विकास हुआ दिखाई देना चाहिये था लेकिन देश की तस्वीर क्या है?

हजारे ने कहा कि देश का सही विकास करना तो एक तरफ देश में बढ़ते भ्रष्टाचार को रोकने के लिए जनलोकपाल और जनलोकायुक्त कानून पास कराने के लिये प्रयास हो रहा है और अन्य कई प्रकार के भ्रष्टाचार को रोकने के लिए चुनाव सुधार, खारिज करने का अधिकार, सत्ता के विकेंद्रीकरण के कानून बनवाने हैं और साथ-साथ कानूनों का सही अमल होने के लिए प्रयास किया जाना है।

उन्होंने कहा कि देश के विविध हिस्सों में सौ आदर्श गांव बनाने हैं। एक तरफ भ्रष्टाचार को रोकना और दूसरी तरफ आदर्श गांव का निर्माण करना देश के विकास के लिए बहुत महत्वपूर्ण काम है।

देश के दुश्मन पर 16 करोड़ रुपए फूंके


एक तरफ भारत की जनता महंगाई के बोझ तले पिस रही है वहीं दूसरी ओर एक ऐसे आतंकवादी पर करोड़ो रुपए फूंके जा रहे है जिसने भारत में सैकड़ों लोगों को मौत के घाट उतार दिया था। तीन साल पहले मुंबई में हुए भयानक आतंकी हमले में जीवित पकडे गए पाकिस्तानी आतंकवादी अजमल कसाब को कैद में रखने पर जनता के खून-पसीने से कमाए टैक्स के करोड़ो रुपए खर्च हो रहे हैं।

कसाब के लिए बनाई गई स्पेशल सेल पर 5.29 करोड़ रुपए खर्च हुए। कसाब की सुरक्षा के लिए तैनात भारत तिब्बत सीमा पुलिस की विशेष टुकड़ी पर 10.87 करोड़ रुपए खर्च हुए। कसाब के खाने-पीने पर 27,520 रुपए और ईलाज के लिए 26,953 रुपए खर्च किए गए।

कसाब पर चले लंबे ट्रायल के बाद स्पेशल कोर्ट ने उसे सजा-ए-मौत सुनाई है। लेकिन हाई कोर्ट ने इस फैसले पर 21 फरवरी 2011 को रोक लगाई थी। तब से अब तक कसाब भारतीय कानून व्यवस्था के दांव-पेंचों की खामियां उठाते हुए सरकारी मेहमान बना बैठा है। महाराष्ट्र सरकार उसके मुकदमें, खाने से लेकर ईलाज तक का खर्च उठा रही है।

ठीक इसी तरह 13 दिसंबर 2001 को संसद पर हमले में साजिश रचने का दोषी ठहराए जाने के बाद 18 दिसंबर 2002 को दिल्ली की एक अदालत ने मौत की सजा सुनाई थी। सत्र अदालत ने 20 अक्तूबर 2006 को अफजल को तिहाड़ जेल में फाँसी दिए जाने का दिन भी तय किया था लेकिन इसके बाद अफजल ने राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका दाखिल की जिन्होंने याचिका को केन्द्रीय गृह मंत्रालय को भेज दिया था।

तब से अबतक अफजल गुरू भी सरकारी मेहमान बना हुआ है। आतंकवादियों को सजा सुनाए जाने पर भी उस पर अमल न होने से जनता का आक्रोश बढ़ता ही जा रहा है लेकिन लंबी न्यायिक प्रक्रिया के चलते इन मामलों से होती देरी से देश विरोधी तत्वों का हौसला बुलन्द होता जा रहा है।

अमिताभ बच्चन की पोती के फोटो की असलियत

अमिताभ बच्चन ने स्पष्ट कर दिया है कि वे अपनी पोती का फोटो फिलहाल जारी नहीं करेंगे क्योंकि यह मामला बेहद निजी है इसके बावजूद लोगों का उत्साह थमा नहीं है। इसका फायदा उठाते हुए कुछ लोगों ने अमिताभ की पोती की नकली तस्वीरें नेट पर डाल दी है, जिसे कई लोग रियल मान रहे हैं।

जाली फोटो

जाली फोटो

फोटोशॉप के जरिये इसे ऐश्वर्या के साथ जोड़ दिया गया है। बिग बी लगातार ट्वीट कर रहे हैं कि इस तरह के सारे फोटो जाली हैं और इन पर यकीन नहीं किया जाना चाहिए। जिस तस्वीर में ऐश्वर्या और उनकी बेटी दिखाई गई है उसकी मूल तस्वीर ‍बिग बी ने जारी की है ताकि उनके प्रशंसक भ्रमित न हो।

मूल तस्वीर

मूल फोटो

Saturday, 19 November 2011

इला भट्ट को इंदिरा गांधी पुरस्कार

जानी-मानी सामाजिक कार्यकर्ता इला भट्ट का प्रतिष्ठित इंदिरा गांधी प्राइज फॉर पीस, डिसआर्मामेंट एंड डेवलपमेंट 2011 के लिए चयन किया गया है। उन्हें यह पुरस्कार बुनियादी स्तर पर महिला सशक्तिकरण में उनके योगदान पर दिया जा रहा है।

इंदिरा गांधी मेमोरियल ट्रस्ट की प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह की अध्यक्षता वाली एक अंतरराष्ट्रीय ज्यूरी ने इस पुरस्कार के लिए गैर सरकारी संगठन सेल्फ एंप्लॉयड वुमेंस ऐसोसिएशन (सेवा) की संस्थापक इला का चयन किया है।

पुरस्कार की घोषणा करते हुए ट्रस्ट के सचिव सुमन दुबे ने कहा कि इला का जीवन समर्पण और प्रतिबद्धता का दूसरा नाम है।

पेशे से श्रम संबंधी वकील इला ने 1972 में सेवा की स्थापना की। उनके नेतृत्व में इस संगठन ने देश में महिलाओं के सामाजिक-आर्थिक और राजनीतिक सशक्तिकरण में अहम भूमिका निभाई। इला ने देश में महिलाओं की पहली बैंक, सेवा को-ऑपरेटिव बैंक की भी स्थापना की।

विधानसभा भंग करा सकती हैं माया

उत्तरप्रदेश के बंटवारे का दांव चलने वाली मुख्यमंत्री मायावती अब विधानसभा भंग करने का दांव भी खेल सकती हैं। मायावती की रणनीति है कि सोमवार से शुरू होने वाले विधानसभा के सत्र के पहले ही दिन लेखानुदान पास कराकर मंत्रिमंडल द्वारा मंजूर किए गए राज्य को चार हिस्सों में बांटने का प्रस्ताव पारित करा लिया जाए। इसके बाद राज्यपाल को विधानसभा भंग करने की सिफारिश कर दी जाए।

इसे अंतिम रूप से तय करने के लिए मायावती के निर्देश पर उनके प्रमुख सलाहकार और विश्वस्त सांसद सतीश मिश्र को शुक्रवार की शाम राज्य सरकार के विमान से लखनऊ बुला लिया गया।

यह जानकारी देने वाले सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री मायावती के खिलाफ सपा और भाजपा ने अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी की है। इसलिए मायावती को आशंका है कि विधानसभा सत्र शुरू होते ही सोमवार को विपक्ष अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस देगा और अगर सदन में मत विभाजन के लिए प्रस्ताव रखा गया तो 40 से ज्यादा जिन बसपा विधायकों के टिकट काटे गए हैं, वह सरकार के खिलाफ वोट कर सकते हैं।

इससे मायावती सरकार न सिर्फ अल्पमत में आकर गिर जाएगी बल्कि बसपा और मायावती दोनों की बेहद किरकिरी होगी।

सूत्रों के मुताबिक इससे बचने के लिए रणनीति बनाई गई है कि सत्र के पहले दिन ही सबसे पहले राज्य विभाजन का प्रस्ताव सदन में रखकर विपक्ष के हंगामे और शोरशराबे के बावजूद उसे ध्वनिमत से पारित करा लिया जाए।

इसके बाद आनन फानन में मंत्रिमंडल की बैठक बुलाकर एक पंक्ति का विधानसभा भंग करने का प्रस्ताव पारित करके राज्यपाल को सौंप दिया जाए। संवैधानिक रूप से राज्यपाल इसे मानने को बाध्य होंगे और चुनाव तक मायावती कार्यवाहक मुख्यमंत्री बनी रहेंगी। इससे विपक्ष को सरकार गिराने का मौका भी नहीं मिलेगा और राज्य विभाजन का प्रस्ताव भी विधानसभा में मंजूर हो जाएगा जिसे बसपा चुनावी मुद्दे के रूप में भुना सकेगी। जबकि अविश्वास प्रस्ताव सदन में पारित होने की स्थिति में मायावती की सरकार जाने के बाद राज्य में राष्ट्रपति शासन लग जाएगा।

मायावती व उनके रणनीतिकार इसकी बजाय अपनी कार्यवाहक सरकार के तहत चुनाव कराने को ज्यादा फायदेमंद मानते हैं। सूत्रों के मुताबिक मायावती और उनके रणनीतिकार पूरी स्थिति का आकलन करके अंतिम फैसला लेंगे, लेकिन विधानसभा भंग करने के विकल्प पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।

कोहली, रैना, गंभीर को सिएट रेटिंग पुरस्कार

भारत के मध्यक्रम के बल्लेबाज विराट कोहली और सुरेश रैना ने शनिवार को क्रमश: सिएट इंटरनेशनल के वर्ष का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाला युवा और टी-20 खिलाड़ी पुरस्कार हासिल किया।

बाएं हाथ के सलामी बल्लेबाज गौतम गंभीर को वानखेड़े स्टेडियम में दो अप्रैल को श्रीलंका के खिलाफ विश्वकप फाइनल में 97 रन की शानदार पारी खेलने के लिए वर्ष की सर्वश्रेष्ठ मैच विजेता पारी का पुरस्कार दिया गया।

इंग्लैंड के बल्लेबाज जोनाथन ट्रॉट को वर्ष से सर्वश्रेष्ठ अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर और वर्ष के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज दो पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उनके साथी जेम्स एंडरसन को वर्ष का सर्वश्रेष्ठ अंतरराष्ट्रीय गेंदबाज का पुरस्कार दिया गया।

भारत के दो और क्रिकेटर विस्फोटक सलामी बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग और वीवीएस लक्ष्मण को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 10 साल पूरे करने और भारतीय क्रिकेट में अमूल्य योगदान के लिए विशेष पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

वेस्टइंडीज के पूर्व तेज गेंदबाज कर्टनी वाल्श ने 2010-11 सत्र का लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार हासिल किया। सभी नौ पुरस्कार हासिल करने वाले खिलाड़ी व्यक्तिगत रूप से पांच लाख रुपए और ट्रॉफी का पुरस्कार हासिल करने इस कार्यक्रम में मौजूद थे।

सचिन को शतक पर मिलेंगे सोने के 100 सिक्के



सचिन तेंडुलकर यदि वेस्टइंडीज के खिलाफ 22 नवंबर से यहां शुरू हो रहे तीसरे और आखिरी क्रिकेट टेस्ट में सौवां अंतरराष्ट्रीय शतक बना लेते हैं तो मुंबई क्रिकेट संघ उन्हें सोने के सौ सिक्के तोहफे में देगा।


एमसीए के संयुक्त सचिव नितिन दलाल ने कहा, ‘‘एमसीए अध्यक्ष विलासराव देशमुख ने फैसला किया है कि यदि तेंडुलकर घरेलू मैदान पर सौवां अंतरराष्ट्रीय शतक पूरा करते हैं तो उन्हें सोने के सौ सिक्के दिए जाऐगे।’’ दलाल ने कहा कि बंगाल क्रिकेट संघ ने भी कोलकाता के ईडन गार्डन पर दूसरे टेस्ट के दौरान यह आंकड़ा छूने की दशा में इस चैम्पियन बल्लेबाज को सोने के सौ सिक्के देने का वादा किया था।

तेंडुलकर कोलकाता में दूसरे टेस्ट के दौरान ऐसा नहीं कर सके और अब उनके पास अपने घरेलू मैदान पर मुंबई में यह कर दिखाने का मौका है।

तेंडुलकर ने पिछला अंतरराष्ट्रीय शतक विश्व कप के दौरान 12 मार्च को नागपुर में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ बनाया था।

कांबली के आरोप गैर जिम्मेदाराना-पवार

श्रीलंका के खिलाफ भारत का विश्वकप 1996 सेमीफाइनल क्रिकेट मैच शायद फिक्स होने के विनोद कांबली के आरोपों को ‘गैर जिम्मेदाराना’ करार देते हुए आईसीसी अध्यक्ष शरद पवार ने शनिवार को कहा कि वे इसकी जगह इस मुद्दे पर सचिन तेंडुलकर और सौरव गांगुली जैसे खिलाड़ियों की बात पर विश्वास करेंगे।

खेल मंत्री अजय माकन की जांच की मांग के बावजूद बीसीसीआई ने कांबली के आरोपों को तवज्जो देने से इनकार कर दिया।

पवार ने भी इसके बाद कहा कि ईमानदारी से कहूं तो मुझे लगता है कि यह आरोप गैर जिम्मेदाराना बयान हैं। उन्होंने कहा कि इसकी जगह मैं उस पर विश्वास करूंगा, जो सौरव गांगुली, सचिन या अजित वाडेकर कहेंगे।

बीसीसीआई के पूर्व प्रमुख पवार ने कहा कि अगर कांबली ईमानदार और प्रतिबद्ध क्रिकेटर होते तो वह अब यह मामला उठाने की जगह 1996 में विश्वकप खत्म होने के बाद यह आरोप लगाते।

पवार ने ‘टाइम्स नाउ’ से कहा कि अगर वह ईमानदार और प्रतिबद्ध क्रिकेटर होता तो वह तब इस बारे में बात करता, लेकिन वह चुप रहा इसलिए मैं उसे गैर जिम्मेदाराना ठहराता हूं।

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