Saturday, 19 November 2011

विधानसभा भंग करा सकती हैं माया

उत्तरप्रदेश के बंटवारे का दांव चलने वाली मुख्यमंत्री मायावती अब विधानसभा भंग करने का दांव भी खेल सकती हैं। मायावती की रणनीति है कि सोमवार से शुरू होने वाले विधानसभा के सत्र के पहले ही दिन लेखानुदान पास कराकर मंत्रिमंडल द्वारा मंजूर किए गए राज्य को चार हिस्सों में बांटने का प्रस्ताव पारित करा लिया जाए। इसके बाद राज्यपाल को विधानसभा भंग करने की सिफारिश कर दी जाए।

इसे अंतिम रूप से तय करने के लिए मायावती के निर्देश पर उनके प्रमुख सलाहकार और विश्वस्त सांसद सतीश मिश्र को शुक्रवार की शाम राज्य सरकार के विमान से लखनऊ बुला लिया गया।

यह जानकारी देने वाले सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री मायावती के खिलाफ सपा और भाजपा ने अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी की है। इसलिए मायावती को आशंका है कि विधानसभा सत्र शुरू होते ही सोमवार को विपक्ष अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस देगा और अगर सदन में मत विभाजन के लिए प्रस्ताव रखा गया तो 40 से ज्यादा जिन बसपा विधायकों के टिकट काटे गए हैं, वह सरकार के खिलाफ वोट कर सकते हैं।

इससे मायावती सरकार न सिर्फ अल्पमत में आकर गिर जाएगी बल्कि बसपा और मायावती दोनों की बेहद किरकिरी होगी।

सूत्रों के मुताबिक इससे बचने के लिए रणनीति बनाई गई है कि सत्र के पहले दिन ही सबसे पहले राज्य विभाजन का प्रस्ताव सदन में रखकर विपक्ष के हंगामे और शोरशराबे के बावजूद उसे ध्वनिमत से पारित करा लिया जाए।

इसके बाद आनन फानन में मंत्रिमंडल की बैठक बुलाकर एक पंक्ति का विधानसभा भंग करने का प्रस्ताव पारित करके राज्यपाल को सौंप दिया जाए। संवैधानिक रूप से राज्यपाल इसे मानने को बाध्य होंगे और चुनाव तक मायावती कार्यवाहक मुख्यमंत्री बनी रहेंगी। इससे विपक्ष को सरकार गिराने का मौका भी नहीं मिलेगा और राज्य विभाजन का प्रस्ताव भी विधानसभा में मंजूर हो जाएगा जिसे बसपा चुनावी मुद्दे के रूप में भुना सकेगी। जबकि अविश्वास प्रस्ताव सदन में पारित होने की स्थिति में मायावती की सरकार जाने के बाद राज्य में राष्ट्रपति शासन लग जाएगा।

मायावती व उनके रणनीतिकार इसकी बजाय अपनी कार्यवाहक सरकार के तहत चुनाव कराने को ज्यादा फायदेमंद मानते हैं। सूत्रों के मुताबिक मायावती और उनके रणनीतिकार पूरी स्थिति का आकलन करके अंतिम फैसला लेंगे, लेकिन विधानसभा भंग करने के विकल्प पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।

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